जिया की आंखों में आज आंसू थे। क्या कहेंगे उसे.. हर्ष के आंसू या उदासी के थे..वो तो स्वयं जिया भी तय नहीं कर पाएगी। सा…
शीर्षक - 1- संगम तीरे तर्पण या / 2- फरेब / 3- कहानी 'संगमा' मृत्यु के दरवाजे पर दस्तक देती हुई, सिसकती…
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव चिरैया में रामप्रसाद जी का बड़ा संयुक्त परिवार रहता था। मिट्टी की सोंधी खुशबू, आँगन में…
आधुनिक युग को प्रतिस्पर्धा और महत्वाकांक्षा का युग कहा जाता है। प्रत्येक व्यक्ति जीवन में अधिक सफलता, धन, प्रतिष्ठा और …
( दो प्रवक्ता विद्यालय में सुबह के खाली समय में पुस्तकालय में बातचीत करते हुए। प्रज्ञा समाजशास्त्र विनीता मनोविज्ञान प्…
एक छोटे से गांव में सिया नाम की लड़की रहती थी। उसका घर मिट्टी का बना था। दीवारों पर समय की गहरी दरारें थीं और छत बारिश …
24 दिसंबर की सर्द सुबह थी। मैं अपनी बहनों, बेटे मानित और भांजे वंश के साथ बांके बिहारी गली में खड़ी थी। भीड़ इतनी कि पै…
लघुकथा "बाबा माँ कब आएगी मुझे भूख लगी है" कहते हुए श्यामली ठुनकने लगी। "आ जायेगी मेरी गुड्डो हो सकता ह…
लघुकथा मैं हर दिन तेरा इंतजार करती लेकिन एक दिन पता चला की तुम बहुत बिमार हो।मैं जब तुमसे मिलने गयी ,तब मैनें कहा कम स…
"बाबा बाबा मुझे ये खिलौना मिला है। क्या ये चल सकता है?“ बिटिया विमी जरा देखने तो दे ये रोबोट जैसा खिलौना है क्या?…
मैं एक इवेंट में थी और वहां मैंने कुछ ऐसा देखा जिसने मेरा नजरिया बदल दिया। वहां पूरा परिवार—भाई, बहन, ससुराल के लोग—स…
फाल्गुन का महीना था। बरसाने की गलियाँ अबीर-गुलाल से रंगीन थीं। ढोलक की थाप पर गली-गली गूँज रहा था । “फाग खेलन बरसाने आ…
एक समय की बात है ,एक घर में खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी। वह दिन था, जब उस घर की लाडली बिटिया, फूलों सी कोमल, चांद सी सुंदर…
अपनी बेटी सुनाली के बार-बार आग्रह करने पर रामलाल आज बेटी के विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुआ था । कार्यक्रम …
लघुकथाएं 1 इंतज़ार सरला ने अपने पांच साल के बेटे को आवाज लगाई। अरे बेटा मूंगफली के दाने और पानी वाला बर्तन ले आओ। …
आत्मग्लानि (लघुकथा) शान्ति आज अपने को अस्वस्थ महसूस कर रही थी, सारे बदन टूट रहे थे, शरीर कांप रहा था। बुखार चढ़ता जा …
‘‘कहानी-किस्से लिखता रहता है, काम तो रूपयों से चलता है ......... क्या रक्खा है कागज काले करने में? ..........’’, धनसिं…
जाड़ों की सर्द सुबह में,कोहरे को चीरती एक वैन,रामप्रसाद शर्मा के घर के बाहर आकर रुकी। अलका और अरुण ऑफिस जाने की आ…
मनसा- मां हमारे पास भी उस सेठ की तरह अच्छे-अच्छे कपड़े क्यों नहीं है? उनकी तरह बड़ी गाड़ी क्यों नहीं है? मां -क्योंकि…
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