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मिट्टी की खुशबू
रघु राय: वह निर्भीक दृष्टि जिसने भारत की अंतरात्मा को फ्रेम किया-प्रबुद्ध घोष
  मासी, बस यहीं खड़े रहते हैं ना-रेणु बाला
  एक मज़दूर, एक ममता-ज्योति वर्णवाल
अस्तित्व-निशाअतुल्य
 छवि चिन्तन-ममता गिनोड़िया
 अंततः - डॉ मधु खंडेलवाल
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