वो ख्वाब था या हकीक़त-दिनेश

 वो ख्वाब था या हकीक़त

किस्सा कोई पुराना

कांच की थी किलकारी

या पत्थर का निशाना ?

वो बादलों का झुरमुट

वो चांद का मुस्कुराना

आंखों में आंख डाले

हौले-से उसका मुस्कुराना 

ख्वाब था या हकीक़त?

उसके ज़ुल्फ़ों की लट से

मेरे चेहरे का आशिकाना

जज्बातों की गुनगुनाहट

और होंठों का थरथराना

ख्वाब था या हकीक़त?

लफ्जों की हिचकिचाहट

चाहतों का चिल्लाना

सांसों की सीढ़ियों पे

धड़कनों का चढ़ जाना

ख्वाब था या हकीक़त?

बहकती बयारो की शरारत

छूकर मुझे इठलाना

उसके वदन की खुशबू

मेरे रूह में घुल जाना

ख्वाब था या हकीकत?

वो ख्वाब था या हकीक़त

किस्सा कोई पुराना 

कांच की थी किलकारी

या पत्थर का निशाना ?


दिनेश कुमार राय 

गोला रोड, दानापुर, पटना



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