आया बसंती मौसम -मुकेश कुमार दुबे


होने लगा प्यार का इजहार 

प्रकृति ने मनोरंजन छंटा बिखेरी 

चर-अचर सब करने लगें प्यार।

रंग-बिरंगे पुष्प खिले 

वाटिका हो गई खुशगवार 

मधुकर मधुपान के लिए हुए उत्सुक 

अनायास ही प्रकट हो गया प्यार।

पुष्पगुच्छ लेकर रमणी

आई बागों में मिलने प्रियतम से 

प्रियतम भी प्रियतमा को पाटलपुष्प देकर 

प्रकट किया अब अपना प्यार।

बसंत की मादकता चहुंओर छाई

सबके दिलों में कोमलता लाई

पाषाण ह्रदय भी द्रवित हुए अब 

हिलोरे लेने लगा उनमें प्यार।


रचनाकार : --

मुकेश कुमार दुबे "दुर्लभ" (विद्या वाचस्पति) 

शिक्षक सह साहित्यकार सिवान (बिहार)



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