आज के युग में इंटरनेट केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन की अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। जहाँ एक ओर डिजिटल क्रांति ने बैंकिंग, शिक्षा और संचार को सुगम बनाया है, वहीं दूसरी ओर 'साइबर अपराध' के रूप में एक अदृश्य खतरा हमारे द्वार पर खड़ा है। एक आम नागरिक के लिए यह विषय अब केवल समाचारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके निजी जीवन और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है।
साइबर अपराधी तकनीकी रूप से जितने कुशल होते हैं, मनोवैज्ञानिक रूप से उतने ही शातिर। आम नागरिकों को निशाना बनाने के लिए वे कई तरीकों का उपयोग करते हैं:
* वित्तीय धोखाधड़ी जाली ईमेल या फोन कॉल के जरिए बैंक विवरण, ओटीपी (OTP) या पिन मांगना सबसे आम तरीका है।
* सोशल मीडिया और पहचान की चोरी: फर्जी प्रोफाइल बनाकर किसी व्यक्ति की छवि खराब करना या उसके मित्रों से पैसों की मांग करना अब आम बात हो गई है।
* साइबर बुलिंग और ब्लैकमेलिंग: विशेषकर युवाओं और महिलाओं को निजी तस्वीरों या जानकारी के आधार पर प्रताड़ित करना।
* मैलवेयर और रैंसमवेयर: आपके मोबाइल या कंप्यूटर में वायरस भेजकर डेटा लॉक कर देना और उसे खोलने के बदले फिरौती मांगना।
एक आम नागरिक के लिए साइबर अपराध केवल धन की हानि नहीं है, बल्कि यह गहरा मानसिक आघात भी पहुंचाता है। मेहनत की कमाई एक झटके में चले जाने से व्यक्ति असुरक्षा के भाव से भर जाता है। सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल होने के डर से कई बार लोग रिपोर्ट लिखवाने से भी कतराते हैं, जो अपराधियों के हौसले बढ़ाता है।
'सावधानी ही बचाव है' सूत्र ही सबसे बड़ा सुरक्षा उपाय है।
चूंकि अपराधी अदृश्य है, इसलिए सतर्कता ही हमारा सबसे मजबूत कवच है। नागरिकों को निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए:
* पासवर्ड की मजबूती: अपने सोशल मीडिया और बैंकिंग अकाउंट्स के लिए कठिन पासवर्ड रखें और 'टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन' (2FA) का उपयोग करें।
* अपरिचित लिंक से दूरी: बिना जांचे-परखे किसी भी संदिग्ध लिंक, विज्ञापन या लॉटरी के संदेश पर क्लिक न करें।
* निजी जानकारी साझा न करें: बैंक कभी भी फोन पर ओटीपी या पासवर्ड नहीं मांगता। यह बात हर नागरिक को गांठ बांध लेनी चाहिए।
* प्राइवेसी सेटिंग्स: सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी और तस्वीरों को केवल परिचितों तक ही सीमित रखें।
कानूनी सहायता और समाधान
यदि कोई नागरिक साइबर ठगी का शिकार होता है, तो उसे घबराने के बजाय तुरंत कदम उठाने चाहिए। भारत सरकार ने www.cybercrime.gov.in पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 की सुविधा दी है। घटना के पहले दो घंटों में शिकायत दर्ज कराने से धन वापसी की संभावना काफी बढ़ जाती है।डिजिटल दुनिया एक दुधारी तलवार की तरह है। एक जागरूक नागरिक के रूप में हमें तकनीकी रूप से साक्षर होना पड़ेगा। साइबर अपराध के विरुद्ध जंग केवल पुलिस या प्रशासन की नहीं है, बल्कि यह हर उस व्यक्ति की जिम्मेदारी है जो स्मार्टफोन या कंप्यूटर का उपयोग करता है। सावधानी, जागरूकता और समय पर की गई रिपोर्ट ही हमें इस डिजिटल चक्रव्यूह से सुरक्षित रख सकती है।
ओम जी मिश्र 'अभिनव'
लखनऊ
94500 82362

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