चित्र पर लघुकथा- नमिता दुबे मिशा

 "बाबा बाबा मुझे ये खिलौना मिला है। क्या ये चल सकता है?“

बिटिया विमी जरा देखने तो दे ये रोबोट जैसा खिलौना है क्या?

बाबा खुद एक मंजे हुए मैकेनिक थे। इलेक्ट्रिक चीजें तो उनके हाथ में आ कर यूं सुधरती जैसे कभी बिगड़ी ही नहीं थीं।

पर ये तो कुछ अलग है जरा दूसरी गली वाले राजेश को दिखा लाता हूं। वो इलेक्ट्रॉनिक का मैकेनिक है।

बाबा उसे राजेश के पास ले गए। 

राजेश ने उसे चेक किया और बाबा से बोला "अंकल ये एक बेकार रोबोट है। कभी अच्छा रहा होगा। पर अब इसका कुछ नहीं हो सकता। आप इसे मेरे पास छोड़ दीजिए। हो सकता है कुछ कलपुर्जे कभी उपयोग हो जायें। मैं इसके आपको 100 रूपये दे रहा हूं।"

 और राजेश से 100 रूपये ले कर‌ बाबा विमी के लिए एक गुड़िया खरीद कर ले आये।

विमी बहुत खुश थी। गुड़िया ले कर सबको दिखाती फिर रही थी।

सप्ताह बाद बाद बाबा और विमी बैठे टी वी देख रहे थे।

तभी न्यूज में दिखाया कि बारहवीं क्लास की एक बच्ची जिसने साइंस काम्पटीशन के लिए एक छोटा रोबोट बनाया है।जो घर के काम आसानी से कर सकता है।

कुकिंग के लिए सब्जी काट सकता है। डस्टिंग और झाड़ू कर सकता है।

 स्क्रीन पर वही रोबोट प्रकट हुआ जो फटाफट सब्जियां काट कर दिखा रहा था। झाड़ू उठा कर उसने झाड़ू लगाई। डस्टिंग करके भी दिखा दी। वो छोटा सा रोबोट उछल उछल कर फटाफट सारे काम कर रहा था। वो लड़की उसे रिमोट से आपरेट कर रही थी। उस लड़की को साइंस काम्टीशन में फर्स्ट प्राइज मिला एक लाख रूपए का।

मुंह बाएं बाबा और विमी अपने उस रोबोट को देख रहे थे जिसके लिए राजेश ने उन्हें 100  रूपए दिए थे।

नमिता दुबे मिशा

हैदराबाद
+91 97008 50016



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ