नारी प्रकृति की अनमोल कृति l प्रकृति ने बड़े जतन से नारी की रचना की होगी, जिसमें अमूल्य मानव मूल्यों का भी समावेश किया l नर की तुलना में अधिक मानवीय गुनो को भर दिया l
धैर्य ,साहस, क्षमा ,परोपकार जैसे गुणों के साथ मातृत्व , सहानुभूति, भावना, दया जैसे ना जाने अनेक गुणों का समावेश कर दिया और धरती पर भेज दिया अपनी प्रतिनिधि बनाकर l कहा भगवान के रूप में तुम धरती पर सृष्टि का संचालन करो l
पर क्या मानव ने धरती पर इस परमात्मा की दिव्य योजना का सम्मान किया l क्या नर ने इस दिव्यता को स्थान दिया या नारी ने अपने इस दिव्यतम रूप का स्वयं सम्मान किया l
नवदुर्गा के रूप में देवी के गुणों का समावेश करते हुए कई नारियां अपनी दिव्यता का संदेश देते हुए ईश्वर की योजना को साकार रूप दे रही है l वहीं दूसरी ओर कई नारियां सूर्पनखा बनाकर प्रेम को मजाक समझ कर सिर्फ अपने हवस की पूर्ति में अपना और दूसरे का घर जला रही है l ना प्रेम के महत्व को समझ पा रही है और ना प्रेम के रूप को महत्व दे पा रही है l
शालिनी आज बहुत परेशान थी क्योंकि उसने अनायास ही अपने पति का मोबाइल देख लिया था ,जिसमें उसके पति का ऑफिस की एक लड़की से लगभग दो घंटे बाद हुआ थाl शालिनी समझ नहीं पा रही थी कि पति से कैसे पूछे l पर उसने पूछा_निधि से काफी लंबा बात हुआ है कुछ परेशानी है क्या निधि को कुछ मदद चाहिए l राकेश ने टाल दिया और कहा कि कुछ नहीं है बस ऑफिशियल बात था l पर धीरे-धीरे शालिनी को समझ आ रहा था कि वह सामान्य कॉल नहीं था l
बात ही बात में शालिनी को पता चला कि पिछले दो महीने से राकेश निधि से लगातार कॉल व व्हाट्सएप पर बात कर रहे थे l निधि भी दो बच्चों की मां थी उसका अपना परिवार था फिर भी वह राकेश से लगातार नजदीकी बनाए रख रही थी l
शालिनी ने राकेश से इस समस्या पर बात किया राकेश ने स्वीकार किया कि वह बात कर रहे थे और आगे नहीं करेंगे l
पर क्या यह नहीं थम जाएगा यहीं पर कुछ कहा नहीं जा सकता क्योंकि रिश्ता सिर्फ विश्वास पर टिका रहता है जो टूट चुका है l जीवन में दो चीज ही होती है या तो हां या नहीं l
राकेश ने साफ कह दिया कि मैं अपने से बात नहीं करता था सामने से आता था तभी रिप्लाई करता था l तो क्या राकेश अपने आप से झूठ बोल रहा है ,अगर बात नहीं करता तो ना ही होता पर अगर बात हुआ है तो उसमें आपकी मर्जी भी शामिल थी और आपने भी सपोर्ट किया था l क्योंकि जबरदस्ती कोई किसी से बात नहीं कर सकता है l
निधि को पता है बॉस शादीशुदा है तो भी उसने भरपूर प्रयास किया राकेश को अपने झांसी में लेने काl राकेश को निधि अपना दुख बताकर भावनात्मक रूप से अपनी ओर खींच रही थी l शुरुआत में राकेश के मना करने के बाद भी वह लगातार प्रयास करती रही और राकेश भी बात करते रहे मना नहीं किया l और उसके दुख को कम करने में उसकी मदद भी करने लगे l
पवित्र मन या रिश्ता किसी पाबंदी में नहीं बंधा होता है कि रात में पत्नी सो जाए उसके बाद हम बात करें l एक स्त्री पुरुष के मित्रवत संबंध भी होते हैं जो सभी स्थिति में सामान्य रहता है l पर अगर कोई लगातार दिन में ,रात में व्हाट्सएप चैट कर रहा है ,कॉल कर रहा है तो क्या कहें हम उसे रिश्ते को , वह भी बिना काम के l
जो भी हो पर हर परिस्थिति में सहना सिर्फ शालिनी को ही था क्योंकि पति है राकेश उसका l निधि के पास और ऑप्शन है पर शालिनी के पास नहीं l
शालिनी ने अपनी हर जिम्मेदारी निभाई घर के अंदर भी और बाहर भी l कोशिश किया कहीं कोई कमी ना रह जाए पर शायद हम खुश किसी को भी ,कभी नहीं कर सकते हैं l इतने में भी राकेश को कहां कमी महसूस हुई जो वह निधि की ओर खींचे चले गए यह जानते हुए भी कि वह गलत कर रहे हैं l
इन कुछ महीनो में राकेश शालिनी से थोड़े से दूर ही रहते थे l घर के किसी काम में उसकी मदद नहीं करते थे l बात बात में चिल्लाना ,झगड़ा करना जैसे जीवन का एक हिस्सा बन रहा था पर शालिनी समझ नहीं पा रही थी कि ऐसा भी हो सकता है l
एक वादे के साथ राकेश ने शालिनी से कहा तो है आगे ऐसा नहीं होगा पर क्या ऐसा नहीं होगा?
नारी समाज अपने स्त्रियों चित गुणों को परमार्थ में लगाए ना कि ऐसे उल्टे कामों में l क्योंकि जहां से आप भावनात्मक सपोर्ट चाह रहे हैं वह भी किसी का पति है l और जो अपनी पत्नी से छुपा कर आपको सपोर्ट दे रहा है वह क्या आपका अपना होगा l अपने आप को स्वयं मजबूत बनाएं ताकि आपका स्वयं व दूसरे का विश्वास बर्बाद ना हो l
दीपमाला

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