सच यह 100% सच्चाई और जग जाहिर बात है। मेरा ननिहाल दमोह जिले के पास मगरोंन कस्बा में है। नाना-नानी के यहाँ भगवान का मंदिर है, धर्मशाला है, पहले हाथी-घोड़े सब कुछ है। वहाँ सब है - सभी देवी-देवताओं के मंदिर हैं, शंकर जी का भी मंदिर है। पूरे गाँव में आज भी श्री राम का नाम गूँजता है। वहाँ कलेही माता का दरबार भी है जो मैया की नौ बहनों में शामिल है। नाना के घर में माँ जानकी का भी भव्य मंदिर है। एक बार घर में विवाह का आयोजन हुआ। जैसे की रिवाज है, सभी देवी-देवताओं को प्रथम निमंत्रण भेजा जाता है। उसी तरीके से प्रभु गौरी-गणेश से लेकर सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया। फिर हम सब रिश्तेदारों को निमंत्रण भेजा गया। और माँ जानकी सहित श्री राम प्रभु का सिंहासन को भी बेटी की तरह ससम्मान निमंत्रण देकर आए और उन्हें सिंहासन सहित लेकर भी आए। मंगलाचार और पूजा-विधि एक पुत्री के समान ही सम्पन्न हुई।
विवाह संपन्न होने के पश्चात विदाई की वेला आई। जिस दिन माँ जानकी के सिंहासन की विदाई का समय हुआ, मेरी मामी ने उन्हें साक्षात पुत्री के रूप में विदा किया। जैसे घर की बेटियों को विदाई में उपहार, वस्त्र दिए जाते हैं, वैसे ही माँ जानकी की विदाई में साभूषण, राशन सहित सब कुछ अर्पित कर विदाई की गई। सिंदूर, महावर करके हमारी मामी ने जब उनका मुख अपने आँचल से बेटी स्वरूप, समाज के भाव में स्नेह से पोंछा, तो उनकी आँखों से साक्षात अश्रु गिरे। तब मामी अचंभित हो गईं और सबको बोलीं कि "मेरा आँचल उँगली तक गीला हो गया।" उस समय सभी उपस्थित थे, गाजे-बाजे के साथ विवाह विदाई समारोह चल रहा था। तब यह बात प्रत्यक्ष प्रमाण की तरह हवा की तरह फैल गई। देखा तो सही में माँ जानकी के नयन सजल थे।
रिश्ता तो बेटी का था ही, लेकिन फिर उसी दिन हमारी माँ, मौसी लोगों ने सभी ने उन्हें अपनी बड़ी बहन स्वीकार किया। और अभी से हम उन्हें जानकी माता को जानकी मौसी और श्री राम प्रभु को मौसा जी का रिश्ता मानते हैं हमारा सौभाग्य है की जगत के पालन हारे हमारे मौसी मौसा हैं हमें अपने सौभाग्यशाली रिश्ते पर बहुत स्वाभिमान होता है। प्रभु श्री राम और माता जानकी से यही प्रार्थना है की जन्म जन्मांतर तक यही रिश्ता से हमारी जिंदगी की डोर बंधी रहे । प्रभु जो भी गलती हुई हो शब्दों में उसे सुख को क्षमा करें और आशीर्वाद प्रदान करें। सच्ची आराधना में बहुत बड़ी शक्ति होती है यदि श्रद्धा, विश्वास और भाव से पत्थर की प्रतिमा पूजी जाए तो साक्षात उसमें आत्मा का वास होता है और प्रभु की कृपा का आशीर्वाद प्राप्त होता है
राजेश्वरी बाजपेई
जबलपुर म. प्र.)

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