सस्मरण /व्यक्तिगत अनुभव/जीवन की घटनाएँ
हमेशा से ही घुमने का दोस्तों के साथ वक़्त बिताने का शौक रहा है,काम की तरफ़ से ट्रेनिंग पर जाना लगता था कि चलो फिर से मस्ती का मौका मिला ,सोचते थे कि कुछ देर अटेंड करेंगे फिर दोस्तों के साथ मस्ती करेंगेसी रेस्तरां मे बैठेंगे , ऐसा ही अवसर हाथ लगा जब आपदा मैनेजमेंट की ट्रेनिंग पर जाने का ख़त मिला ,तुरन्त दोस्तो को फ़ोन किया कौन कौन जा रहा है और रेस्तरां के प्रोग्राम की रूप रेखा भी फ़ोन पर तैयार हो गई।वो दिन भी आ गया जब ट्रेनिंग पर जाना था ,सबने अपनी अपनी कार फ्री पार्किंग में पार्क की और सिर्फ एक कार के साथ रवाना हो गए ट्रेनिंग स्थल की ओर सब दोस्तों ने ये ही सोचा था हर दफ़ा की तरह इस दफ़ा भी आधा दिन की हाज़िरी लगा कर दोपहर को निकल जाएँगे।मग़र हमारे सपनो पर तब पानी फिर गया जब ट्रेनिंग देने वाला अफसर सामने आया वो और कोई नही था हमारा ही बिग बॉस था ,फिर सबने प्लानिंग की कोई बहाना बनाकर लंच के बाद निकल जाएँगे मग़र बॉस तो हमारा इरादा जानता था शायद इसलिए उसने घोषणा की ट्रेनिंग दो पार्ट में होगी ,पहले में थ्योरी फिर प्रैक्टिकल और दोपहर आखिर में एग्जाम ,जो उस एग्जाम में पास होगा उसे ही ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट मिलेगा ,और ये सभी के लिये अनिवार्य है, हमारे सभी सपनो पर पानी फिर गया ,मन ही मन सभी दोस्त बॉस को कोस रहे थे ,मग़र मजबूरी थी पूरी ट्रेनिंग पर ध्यान दिया ,और जैसे तैसे सभी दोस्तों ने एग्जाम भी पास कर लिया , सभी ने उसकी सेलेब्रेशन काफी और चॉकलेट से की, और फिर से अपने अपने कार्य मे मशगूल हो गए।
गर्मियों की शुरुआत होने लगी थी ,मैने पत्नी ने अपने काम पर 10 दिन की छुट्टियाँ लिखा ली थी ,हमारा प्रोग्राम बेटे और उसकी मंगेतर के साथ अपनी कार से स्वीटजरलैंड में छुट्टियाँ मनाने का प्रोग्राम था, कॉटेज बुक था ,तकरीबन 8 घण्टे के सफ़र के बाद स्वीटजरलैंड पहुँचे , तीन कमरे थे और हम चार ,बच्चो ने अपनी पसन्द का कमरा लिया जिससे पहाड़ दिख रहे थे ,हमे सिर्फ बाहर वाली सड़क ही खिड़की से नज़र आ रही थी , जल्दी फ्रेश होकर हमने पास के पहाड़ पर ट्रॉली से जाने का प्रोग्राम बनाया ,क्योंकि कॉटेज के नजदीक था वरना तो ड्राइव से इतना थके थे मन ही नही था,खैर पहाड़ की चोटी पर पहुँचकर जो नीले पानी की झील देखी सब थकान भूल गए,बस लग गए फ़ोटो पर फ़ोटो खींचने,अँधेरा होने लगा था वापस कॉटेज में हम पहुँच गए और खाना जो साथ लाये थे वो ही गर्म करके खा लिया ,बाहर बिजली कड़क रही थी बरसात भी पहाड़ों वाली अपने चरम पर थी ,हम सभी ने मीठा खाने के बाद लूडो खेलना शुरू किया ,तकरीबन रात के 11,30 बज चुके थे ,तभी बेटे ने कहा पापा देखो दरवाजे से पानी अंदर आ रहा है, मैने देखा कि दरवाजे के नीचे से पानी के साथ मिट्टी भी आ रही है मैने पर्दा हटाकर बाहर झाँका तो मेरे होश उड़ गए बाहर पानी के साथ मिट्टी पत्थर ,कीचड़ इतनी ऊपर तक आ चुकी थी कि दरवाजे का आधे से ज्यादा हिस्सा डूब चुका था मतलब साफ था उस तरफ सिर्फ मौत थी किसी भी वक़्त दरवाजा टूट सकता था ,मुझे आपदा मैनेजमेंट ट्रेनिंग की बाते याद आने लगी कि घबराना बिल्कुल नही नॉर्मल रहना है ,मैने उन्हें कुछ नही बताया और बेटे को कहा एमरजेंसी को फोन करो , वो फ़ोन मिलाने लगा मैने धीरे से उसे समझा दिया और ख़ुद बाहर निकलने का रास्ता देखने के लिए अपने कमरे में गया ,वहाँ की खिड़की से झाँकने के बाद कुछ उम्मीद दिखी की इधर से कूद कर बचा जा सकता है ,जल्दी अंदर आकर बच्चो से कहा कि यहाँ से जल्दी निकलो मेरे कमरे की खिड़की से,
मग़र तभी अचानक अँधेरा छा गया दरवाजे खिड़की सब टूट गए पानी ने हमको बहुत जोर से दीवार के ऊपर दे मारा ,मग़र होश बाक़ी था ,देखा कि एक अलमारी पत्नी के ऊपर गिरी उसे हटाकर उसको निकाला, बच्चो को आवाज़ लगाई मग़र कोई जवाब न मिला पत्नी बस बच्चो का नाम लेकर उधर जाना चाहती थी जिधर अँधेरा और मौत के सिवा कुछ न था,मुझे ट्रेनिंग की बातें याद थी पहले ख़ुद को बचाओ फिर औरों के लिए मदद लेकर आओ बस पत्नी का हाथ कसकर पकड़ा और खिड़की से छलाँग लगा दी ,बस पत्नी का हाथ पकड़ कर चीख़ रहा था हेल्प , ऊँची जगह पर पहुँचा तो सिर्फ एक आदमी मदद को आगे आया मैने बताया कि मेरा बेटा और उसकी मंगेतर अंदर फँसे हैं उनको निकालना है मैं मेरी पत्नी और वो अंजान मददगार नीचे एक दूसरे का हाथ पकड़कर वापस गए क्योंकि पानी का बहाव बहुत तेज था ,तभी अँधेरे में एक किरण दिखाई दी मेरे बेटे का साया और उसके एक हाथ मे मोबाइल जिसकी टॉर्च जो ऑन थी और दूसरे हाथ से उसने अपनी मंगेतर को पकड़ा था और वो रास्ता ढूँढ रहा था मैंने कहा हमारी आवाज़ की दिशा में आए ,थोड़ी देर में वो दोनों हमे नज़र आए मग़र बीच मे पानी गहरा और बहुत स्पीड के साथ, उस अंजान आदमी की हाइट ऊँची थी इसलिए वो आगे गया मेरा एक हाथ पकड़ कर,मेरी पत्नी ने एक हाथ मेरा हाथ थामा दूसरे से एक लोहे के खम्बे को पकड़ा ,पहले बेटे की मंगेतर को बाहर निकाला फिर बेटे को निकाला ,इस बीच उस अंजान आदमी का बेलेंस बिगड़ा और मेरा उसके हाथ छुट गया वो पानी के साथ बहने लगा लेकिन मेरे बेटे ने मेरा हाथ थामा और मैने कोशिश करके फिर से उसका हाथ पकड़ लिया और उसे भी बाहर खिंच लिया ,इतने में हेलीकॉप्टर की आवाज़ नज़दीक पहुँच चूकी थी,उसमें से कमांडो उतरे और हमे हेलीकॉप्टर से हॉस्पिटल पहुँचा दिया गया , जहाँ हमारी चोटों का इलाज़ किया गया ,मैने वापिस जाकर दोस्तों को सारे हादसे के बारे में बताया कि किस तरह से ट्रेनिंग ने9 बचाया ,फिर सभी ने कसम खाई की कोई भी ट्रेनिंग को मज़ाक में नही लेंगे ,कब क्या काम आए कुछ पता नही ?
कपिल कुमार
अभिनेता ,लेखक , पत्रकार
बेल्जियम
Kapilbelgium@hotmail.com

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