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रघु राय: वह निर्भीक दृष्टि जिसने भारत की अंतरात्मा को फ्रेम किया-प्रबुद्ध घोष
नन्ही कली-रेणु बाला
 नग है खारुन नदी का-सूरज संतु
 दहन-प्रतिमा यादव
कविता- आदिवासी स्त्रियाँ
कब टूटेंगी निंद्रा-कुंदन पाटिल
धरती फरियाद करे- संजय
 बाल कविता- तितली रानी व जन्‍मदिन -पूनम दीक्षित
देश गीत- राजेश मृदुल
बैद्यनाथ -डॉ ऋतु अग्रवाल
  दो हृदय रोने लगे-डॉ ऋतु
योग- ज्‍योति
योग दिवस-सीमा
योग- दीपमाला
सजाए हैं सपने-दुर्गेश्वर राय
सपना हो ना सका अपना-कंचन योगेंद्र
 सुबक रहे हैं कुछ सपने --दिनेश कुमार राय
सोनम और मुस्कान-नीतू रानी
रेखा की ग़ज़ल
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