आधुनिक भारत की लंबी और बेचैन कथा में बहुत कम दृश्य-इतिहासकार ऐसे हुए हैं जिन्होंने रघु राय जैसी नैतिक स्पष्टता, भावनात्…
कविता नन्ही कली घर की लक्ष्मी मात- पिता का मान । बाँटती सबको खुशियाँ बेटी है घर की शान।। नन्हे- नन्हे कदमों से चलती ज…
नग है खारुन नदी का, जाना है समुद्र पार। ओढ़ चूनरी स्याह तारों की, चाँद की लगाई चमकीली बिंदी। लहरों की पहने चूड़ी। नग …
दहन हो गई वो भाभी जल गयी उसकी चिता घर में ही। रो रही थी वह क्रूर निर्मम हत्यारों के सामने। आर्तनाद स्वर से। जिसके नाम …
जिनकी रगो में धड़कती ईमानदारी, जिनकी संवेदनाओं के बादल हथेलियों की रेखाओं में बसे हुए, अपने नवोदित स्वप्न टूटत…
हिन्दू हूं हमेशा की तरह मैं सोया था और एक आवाज आई! जागो हिन्दूओं जाग जाओ। निद्रा गहरी थी पर इस बार जगाने वाला एक …
कण-कण में जिसके अमृत बसा है । मानव ने क्यों उसको ठगा है ? मिट्टी ,पत्थर , आव , हवा , वन , छीने सब उसके संसाधन । घर-…
कितनी प्यारी तितली रानी हरदम करती है शैतानी । इधर -उधर है उड़ती रहती करती बस अपनी मनमानी। रंग बिरंगे पंख निराले मन…
भारत मां के लाल हैं हम भारत मां के लाल हैं। सहिष्णुता के ध्वज वाहक हैं शौर्य सुयश महिपाल हैं।। भारत मां •••••••••।। सदा…
झारखंड में शिव शंकर का,अनुपम हुआ निवास है। बैद्यनाथ भोले भंडारी,जीवन भरे उजास है।। बैद्यनाथ की गाथा सुन लो,महिमा बड़ी…
प्रेम का दीपक बुझाकर लोग खुश होने लगे। पीर का संत्रास पाकर दो हृदय रोने लगे।। प्रेम को ईश्वर कृपा का रूप सुंदर जानिए। ह…
साहित्य सरोज सप्ताहिक आयोजन क्रम - १०में तृतीय स्थान प्राप्त योग दिवस स्वस्थ रखना है मन को सदा खुश रहेगा तन …
साहित्य सरोज साप्ताहिक आयोजन क्रम -10 में द्वितीय स्थान प्राप्त (01) सोमवार और मंगलवार ( कविता/गीत/दोहे)…
साहित्य सरोज साप्ताहिक आयोजन-10 योग योग सिखाता है जीवन जीने का सलीका l स्वास्थ्य को सही कैसे रखे बताता है तरीका …
साहित्य सरोज साप्ताहिक आयोजन क्रम –9 पलकों ने जब जब सजाए हैं सपने नई नई राहें बनाए हैं सपने। चाहे सिकन्दर हो चाहे हो च…
साहित्य सरोज सप्ताहिक आयोजन क्रमांक 9 खुली आंखों से देख रहा था, मैं एक सुंदर सपना l पीले और सफेद रंग का दो, मजली मेरा …
सुबक रहे हैं कुछ सपने जंग की जागीर में मेज और मसलों से दूर सरहद के आस-पास लहू से लथपथ आहत, व्यथित, अश्रुमय सुबक रहे…
लड़की की मर्जी से करना अब अपने लड़के की शादी, नहीं तो होगी दो कुलों की बड़ी भयंकर बर्बादी। अभी कुछ दिन पहले घटी सौरभ…
बहुत ही लम्बे समय के बाद आपके सामने एक रचना मौसम की तरह बदल रहा जमाने का मिजाज देखो कागज के फूलों में से खुशबू आ रही…
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