ऐ जिंदगी सुन-

 ऐ जिंदगी सुन  तू तो बेहद हसीन है, 

पर क्या तू जितनी बाहर से खूबसूरत है ।

तू अन्दर से भी उतनी ही रंगीन है, 

तू मत दिखा ऐसे सपने, 

जिसे तू कभी पूरा ना कर सके। 

तू मत कर कोई ऐसा वादा ,

जिसे तु कभी निभा ही ना सके।

तू मत दिला कोई ऐसी उम्मीद,

जो तु कभी पूरी ना कर सके। 

तू हर बढ़ते कदमों के साथ, 

नए सपने दिखती है। 

फिर अगले ही क्षण 

कोई ज़ख्म नया दे जाती है। 

तू ऐसे ही ना उलझाया कर, 

जिसे कभी कोई सुलझा ही ना पाए। 

तू परत-दर-परत खुद में ही सिमटी रहती है, 

क्यूँ तुझे कोई भी समझ ही ना पाता है ।