नग है खारुन नदी का,
जाना है समुद्र पार।
ओढ़ चूनरी स्याह तारों की,
चाँद की लगाई चमकीली बिंदी।
लहरों की पहने चूड़ी।
नग है खारुन नदी का,
जाना है समुद्र पार।
राह में मिली सखी भूमि
सींचा सखी को सलिल से।
भेंट की हरी ओढ़नी।
दीप जला,आरती गा,
हर्षित हो,
किया स्वागत सरिता का।
भूमिपुत्र ने दोहन कर,
धोअन दी।
सरिता को किया कलुषित।
रौद्र रूप धर।
आज उफन रही है सरिता।
कितनों के भवन कितनों की फसलें हुई बर्बाद।
नग है नदी का खारुन।
जाना है समुद्र पार।
स्वर्ण सी सूरज की नथ पहने
बादल का लगा काजल।
सज कर चली समुद्र से मिलने
उषा की ऊष्मा से
बिखर गया श्रृंगार।
समुद्र में मिलने से पहले
मानव ने नदियों को बनाया,
प्रदूषित नाला।
नग है नदियों का खारुन,
जाना है समुद्र पार।
नाम -सूरज संतु राम धनकर
मोबाइल नंबर- 9770542124
ग्राम - कानामुका पोस्ट- कचना
जिला-धमतरी ,छत्तीसगढ़ ,पिन कोड-493770

0 टिप्पणियाँ