कविता
नन्ही कली घर की लक्ष्मी
मात- पिता का मान ।
बाँटती सबको खुशियाँ
बेटी है घर की शान।।
नन्हे- नन्हे कदमों से चलती जब
सपनों की राह बनाती है।
मेहनत और लगन से
ख्वाब पूरे कर जाती है।।
माँ की ममता पिता का अभिमान
बेटी से ही घर का सम्मान।
सस्कारों की वह पहचान
बेटी बढ़ाती परिवार का मान।।
साक्षर बनाकर जब आगे बढ़ती
दुनिया में नाम कमाती है।
हर मुश्किल का सामना करके
जीवन को सफल बनाती है।।
कभी बहन बनकर प्यार लुटाए
कभी दोस्त बनकर साथ निभाए।
कभी माँ बनकर डाँट लगाए
हर रिश्ते को बखूबी सजाए।।
बेटी खिलखिलाती जब
महक जाता घर आँगन
उसकी प्यारी बातों से
खुशियों से भर जाता, मात पिता का दामन।।
जिस घर में बेटी है
वहाँ खुशियों की बहार है।
बेटियों की हँसी में
वीणा की झंकार है।।
रेणु बाला
297 ममता एनक्लेव
जीरकपुर (पंजाब)
9217217153

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