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ठंडी हवाओं के झोंकों के साथ
टप टप बरसता पानी
मन मयूरा झूम कर कहता
स्वागत आपका बरखा रानी ।।
सावन के आते ही
आती प्रियतम की याद
नीर को देख
मन करता जाऊं मैं
खुले गगन के नीचे
अपने दिलरुबा के साथ
करने मोहब्बत की बात ।।
लगते जिगर ,मेरी जान
बसी रहती दिल में हरदम
पर ना जाने क्यों
सावन में सुहानी लगती
उसकी शोखियां,
उसका अल्हडपन ।।
बारिश की बूंदों के साथ
कर्णप्रिय लगती
उसकी पायल की छन छन
उसका मुस्कुराना, बतियाना देख
दिल में आ जाती
अलग ही तरंग।।
सामीप्य पाने को उसका
आतुर रहता बहका मन
दिल - सावन के इस अटूट बंधन को
क्या दे दूजा नाम हम ।।
ईश्वर के इन
नायाब ताेहफाें के साथ
जी रहा इंसान
बरखा - प्रियतम
करते धरा संग मन को हरा भरा
यही सावन की पहचान
यही इसकी पहचान
यही मेरा पैगाम ।।
सतीश लाखाेटिया
नागपुर ( महाराष्ट्र)
9423051312
9970776751
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