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सजनी पियाऽ, नहीं घर आये।
बुनिया बरसनऽ लागे ना।
घुमड़ऽ - घुमड़ऽ के, आये बदरवा।
बिजली चमकेऽ ना।
सखी होऽ रहिऽ- रहिऽ जिया घबराये।
बुनिया बरसनऽ - - - -
पिया गये कबोऽ, सुधियो ना लिहले।
पतियो भेजे ना।
सजनी घर आँगन ना भाये
बुनिया बरसनऽ - - - -
बाट जोहत मोरा, अँखिया दुखे।
घुरतऽ नयनवा ना।
सखी हो, कबहू चयन नाहिऽ आये।
बुनिया बरसनऽ - - -
चइत मास, बैसाख मास, बिते
बितलऽ अषढवा ना।
सजनी सावन बितलऽ जाये।
बुनिया बरसनऽ - - - -
उपेन्द्र अजनबी
सेवराई गाजीपुर उ प्र
मो - 7985797683
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