सावन आयो-संज्ञा तिवारी




आप का इस बेवसाइट पर स्‍वागत है।  साहित्‍य सरोज पेज को फालो करें(  https://www.facebook.com/sarojsahitya.page/
चैनल को सस्‍क्राइब कर हमारा सहयोग करें https://www.youtube.com/channe /UCE60c5a0FTPbIY1SseRpnsA






सावन के दिन आए सखी
ऋतु पावस मोहे भाये


चातक मोर पपीहा देख सखी
पीहू पीहू शोर मचाए।


रिमझिम रिमझिम पड़ी फुहारें
बदरा भी गरजाए।
चपला की चमचम से मेरा
मनवा डर डर जाए।


ताल तलैया पूरित होकर
 उफन उफन हरसाय।
हरित चुनरिया ओढ़ वसुंधरा
मंद मंद मुस्काए।


अमवा की डाली पर सखियां
झूलत कजरी गायें।
राग मल्हार को छेड़े प्रियतम
मिले बिन रहा न जाए।


देख सखी सावन के दिन आए


संध्या तिवारी
विदिशा मध्य प्रदेश



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ