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"हे ईश्वर लगता हैँ ये बच्चा नही बचेगा। इतना खून बह गया। "
पड़ोस की ताई चिलाई । ' अरे ये
तो आनन्द का बेटा हैँ, तमाशा मत देखो उठाओ इसे हास्पिटल लेकर चलो जल्दी ।' रामलाल ज़ी ने बच्चे को घेरे भीड़ से कहा । उस दिन मै दफ्तर मेँ फ़ाइलों मेँ उलझा था कि सुमन का फोन आया "राजू ...राजू ..बचा लो मेरे राजू को , छत से गिरकर सर फट गया, हास्पिटल मेँ हैँ ।" सुन
कर मुझे चक्कर आ गये ।
बीस मिनट मेँ (जो मुझे घंटो जैसे लग रहें थे )मै हास्पिटल पहुंच गया देखा सामने मेरा नौ
वर्ष का बेटा राजू जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था । सुमन मुझसे लिपटकर रो रही थी । नर्स ने आकर कहा "किसी भी ब्लड बैंक मेँ ' बी पॉज़िटिव ' ग्रूप का ब्लड नही हैँ । मैने तुरंत
अपना और सुमन का ब्लड चैक कराया । नर्स ने कहा " आप दोनो का ब्लड आपके बच्चे से नही मिलता । जल्दी इंतजाम करो वर्ना बच्चा मर जाऐगा । "
हम दोनो के ह्रदय पर बहुत बड़ा वज्रपात था ।
हमारे परिवार के सोलह सदस्यो और बाइस मित्रो के ब्लड चैक करने पर भी किसी का ब्लड' बी पॉज़िटिव ' नही मिला । उफ़ ये कैसी लीला थी । राजू कि हालत और बिगड़ गयी । सुमन दुःख से बेहोश हो गयी । मै अंदर हीअंदर टूटने लगा और सभी देवी देवताओ से प्रार्थना करने लगा । " मेरे राजू को बचा लो ..मेरे ईश्वर । "
नर्स कि आवाज ने चौंकाया "ब्लड मिल गया, बच्चे मेँ धीरे धीरे सुधार हो रहा हैँ । "नर्स के इन शब्दो ने मुझे और सुमन को नयी जिंदगी दें दी ।
कुछ देर बाद मेरा राजू मुस्कुरा रहा था । मेरे आँसुओ को पोंछते हुये बोला " पापा, मै ठीक हुँ ना , अच्छे बच्चे नही रोते । "सुमन उसे बेतहाशा चूमने लगी । मै नर्स के साथ दूसरे कमरे मेँ
ब्लड देने वाले का आभार प्रकट करने गया तो सन्न रह गया । सामने सारिका लेटी थी । मेरा पहला प्यार।
मै बस यही कह पाया
" सारिका ...तुमने 'रक्त दान ' नही बल्कि ' जीवन दान ' दिया हैँ ।
ड़ा0 मदन पाल बिरला ' ग़ज़ब '
विकासनगर , देहरादून ,
उतराखंड
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