प्रवासी मजदूर - अलका

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कहानी


ज बीसवां दिन था लाकडाऊन को "कमला ने पति से कहां सारा राशन खत्म होगया है मकान मालिक कह रहा था इज्जत से खाली कर दो वर्ना सामान फेंक दूंगा तुमने डिपाजिट भी नही दिया है एक महिने का एडवांस ही देते हो।
क्या करे गांव चले ...? 
"भोलू बोला मेरी समझ में नहीं आ रहा की क्या करु ... 
कोई साधन नहीं है , जो ले जा रहे है , वह बहुत पैसा लूट रहे है ...
हम दोनो की बात होती तो चल पड़ते पैदलपर साथ में छोटा बच्चा है तुम गर्भ से हो कैसे पैदल ले चलू ..
तुम्हे वैसे भी कोई सुख नहीं दे पाया अब इस हाल में गांव जाने की व्यवस्था भी नही कर पा रहा हूं और भोलू रोने लगा !
" तब कमला बोली यहां बेइज्जत होने से अच्छा है घर चलते हैं ,आप की साईकिल पर सारा सामान बांध लेंगे व मुन्नीयां 
को बिठा देंगे , मुझमें इतनी हिम्मत है की मैं पैदल गांव का रास्ता नाप लूगी ..
ज्यादा हुआ तो रुक रुक कर जायगें , "
भोलू बोला चलो सामान बांध लो रास्ते थे लिए खाना व पानी भर लो बच्चे थे लिए भी सम्मान रख लेना "
कमला बोली सब बांध दिया है जो राशान था सब की नमक डाल मिक्स कर रोटी बना ली है 
साईकिल पर सब सामान बांध दिया अब तेरे मत करो निकलो "
"भोलू तो झूठ ही पूछ रही थी तैयारी थी तो नौटंकी क्यो ...? 
मकान मालिक की बाते बर्दाश्त नही हुई बहुत उल्टा सीधा बोल कर हम प्रवासी मजदूरों को बेइज्जत कर  गया , हम मेहनत की खाते है , इतना अपमान क्यों बर्दाश्त करें ...
लोगो का काम करते है ! "
हम न हो तो पता लगे साहूकारों को .
"भोलू बोला गुस्सा बंद कर चल फिर मुन्नीयां को साथ लिया मकान मालिक को आवाज देकर कहां अपना घर सम्भालो हम जा रहे है । रास्ते में कमला को तेज बुखार आ गया , पर वह हिम्मत नहीं हारी ... चलती जा रही थी , एक जगह सेवाधारी मिले जो ।प्रवासी मजदूरों को मुफ्त भोजन पानी दे रहे थे , खाना खाकर पानी पी कमला।वहीं ढेर हो गई उठने की ताकत नहीं थी । 
भोलू रोने लगा ...तब कुलदीप सिंग बोला चाचा क्या हुआ कमला की हालत देख कुलदीप ने पहले दवा दी और कहां मेरा रुम पास में तुम आज यहीं रुको कल मैं तुम्हें तुम्हारे गांव भेजने का इंतजाम करवाता हूं , इस तरह मत जाओ नहीं तो चाची रास्ते में ही दम तोड देगी भोलू कुलदीप के पैरों में गीर कर रोने लगा मैं किसी भगवान को नहीं जानता मेरे भगवान आप ही हो 
जहां काम करता था , उसने मददत नही की , जहां रहता था उन्होंने निकाल दिया ...आप को जानता तक नहीं आप फरिश्ता बन कर आयो वो बात कर रहा था तभी कमली को भी दवा से आराम हो गया था वह उठ कर बैठी बोली चलो मैं ठीक हूं । 
"कुलदीप बोला चाची इस हालत में पैदल मत जाओ मेरे यहां रुको कल मैं भिजवा दूंगा आराम से चले जाना ! " कमला बहुत बहुत उपकार पर हमारे पास पैसे नहीं है हम पैदल ही चले जायेंगे ...तभी पुलिस वाले चीप लेकर आये बोले कुलदीप खाना है भुख लगी है कुलदीप ने कहां खाना तो बहुत है ..आज आप थी मददत की जरुरत है । एक पुलिस बाला बोला आज तुमको हमारी मददत की जरुरत तुम तो सबकी मदद करते हो बोलो हम करेंगे और थोडा सा पुण्य अपनी झोली में भी भर ले"तो "कुलदीप ने कहा मैं इन लोगो से कह रहा था की रुक जाओ कल मैं कोई इंतजाम करवाता हूं , पर बहुत खुद्दार लोग है नही मान रहे , आप अपनी चीप कुछ घंटों के लिऐ दे दे तो यह लोग अपने घर पहुंच जाऐ चाची गर्भ से है बुखार है छोटा बच्चा है साइकल पीछे बंध जायेगी । सरकारी व्यवस्था से जायेगी तो मन में खुशी मिलेगी क्या कहते हो ..." कुलदीप तुम को मना नहीं कर सकते यार पर ड्यूटी का क्या...पुलिस वाला बोला ..मेरा स्कूटर ले जाना छोड़ कर वापस आ जायेगी कौन सा रुकना है दौ सौ किलोमीटर ही जाना है! "तब ठीक है जाओ भेज दो जल्दी पर किसी से कहना नही , ड्रायवर को बोला खाना खाओ और जो कुलदीप कह रहा है कर के घर आ जाना , कमला जीप में जाते हुऐ बोली यह तेरा उपकार कभी नही भुलूगी , दुनिया तुम्हारे जैसे बेटो के बल पर चल रही है ! तुम हो फरिश्ते ... फरिश्ते ऊपर से नहीं आते ...

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई



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