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बात क्या कहूं जमाने की
अब अपनों से डर लगता है
नहीं डर जितना दुश्मनों से
इतना दोस्तों से लगता है।।
स्वार्थ में हो रहे अंधे
करते हैं बहुत मक्कारी
कहें किससे यह अपने हैं
भरी है दिलों में गद्दारी।।
चल रहे थे जिनके कंधों पर
हाथ हम अपना रख के
होते वे श्वेत वस्त्रों में
सीना तान ते हैं काले
कारनामे करके।।
चिंता तुर बहुत है
जमाने की ऐसी फितरत से
नहीं डरते भगवान से
दर्द जितना है इन अंधों से।।
पदमा ओजेंद्र तिवारी
दमोह मध्य प्रदेश।
अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच- सदस्य
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