पेड़ा बाबा की कृपा-पुस्‍तक की समीक्षा अलका पाडेंय द्वारा

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पवन तिवारी कल पवन मेरे घर आये। यहाँ वहाँ की औपचारिक बातें हुईं और उन्होंने मुझे अपना नया कहानी संग्रह भेंट किया, “पेड़ा बाबा की कृपा “ 
मुझे बहुत ख़ुशी हुई। मैंने आशीर्वाद दिया, किताब पर चर्चा भी हुई। मैंने उनका पहला उपन्यास “अठन्नी वाले बाबूजी" भी पढ़ा है। पवन जी एक उच्च कोटि के लेखक हैं। गाँव की महक उनके शब्दों में हमेशा रहती है । 
भविष्य बहुत उज्ज्वल है। हर प्रकार का ज्ञान उनमें है। जिसका एक कारण है कि वो पढ़ते बहुत हैं। ख़ैर पवन के व्यक्तित्व पर चर्चा फिर कभी, अभी कहानी संग्रह की बात की जाए । पवन के जाने के बाद मैं अपनी उत्कंठा को रोक नहीं पाई। किताब को उलट पलट कर देखा।आर .के . पब्लिकेशन ने अच्छा काम किया है। पुस्तक का कलेवर बहुत सुंदर है “शीर्षक “ तो मन में जिज्ञासा पैदा करता ही है कि क्या होगा? ये “पेड़ा बाबा की कृपा “ है क्या आदि मुझ से रहा नहीं गया और मैंने किताब के पहले पन्ने से शुरुवात की , समर्पण पढकर दंग रह गई , पवन ने अपने इस्ट मित्रो को समर्पित की है। उसमें मेरा भी नाम है। यह बात उनके व्यक्तित्व को बड़ा बनाती है । 
अपनी बात में पवन ने बिना किसी भूमिका के अपनी सच्चाई लिखी है। उनकी पीड़ा दिखाई देती है। संघर्ष दिखाई देता है। लेखक वही महान बनता है, जिसने जीवन में संघर्ष भोगा है। पीड़ा सही है। क्योंकि वह दर्द जीता है। तब लेखनी भी दर्द की अनुभूति करती है और जो लिख जाता है, वह अमर हो जाता है । पहली कहानी ( बाऊ जी और कल्लू ) की कहानी ग्रामीण परिवेश,वहाँ के त्यौहार, मकरसंक्राति का गंगा स्नान व एक कुत्ते को पिता का प्यार जो शायद अपने बेटे से ज़्यादा कुत्ते से करते हैं । बच्चे के अंतर्द्वंद्व की बड़ी मार्मिक कहानी है। लेखन ने कथा को बाँध कर रखा है।पाठक को ख़्याल ही नहीं रहता आस पास का, वह कहानी में जीने लगता है । दूसरी कहानी “ग़रीबी वाली जवानी “ शीषर्क भी अपने आप में रहस्य छिपाये है,नाम सोच कर मन में अलग भाव आते हैं, पर जब कहानी पढ़ना शुरु करें तब माजरा अलग, यह कहानी शहरी रंग लिये है।इसमें शहरी एक लड़की की कहानी है। उसकी आत्म कथा “जवानी वाली ग़रीबी “पूरी मुम्बईया कहानी ।“पहली कविता की कहानी “एक बाल सुलभ जिज्ञासा। पूरी कहानी मार्मिक और यथार्थ के रंग में रंगी है। कैसे एक बच्चे की कविता पेपर में छपती है पिता की क्या प्रतिक्रिया.. ?   माँ क्या सोचती है और वह बालक की क्या दशा पूरी कहानी दिल को छू जाती है । गाँव की मासूमियत 
का सुंदर चित्रण।“ साहित्य की जाति “ 
एक अलग विषय को लेखन ने छुआ है ..यह विषय जल्दी कोई उठाने की हिम्मत नहीं करता, पर पवन तिवारी ने यह कहानी लिख कर  समाज व साहित्यकारों को आईना दिखाया है। यह कालजयी रचना होगी , एक दलित और सवर्ण का बहुत बारीकी से चित्रण है। जो आज हो रहा है, सवर्ण बच्चे भोग रहे और क्रोध आता है उन्हे देखकर, कि कितनी ग़लत प्रथाएं हम ढो रहे हैं । बड़े साहस का काम किया है लेखक ने, साहित्य की जाति बताकर, यह कहानी समूचे समाज को आईना दिखायेगी।भविष्य में इस कहानी पर बहुत चर्चायें होंगी। “अत्तारकारी पत्तरकारी “ पूरी कहानी पत्रकार के संघर्ष की कहानी है , एक करुण कहानी , वेतन न मिलने पर भुक्तभोगी के क्या भाव और क्या दशा, घर की दशा,बेहद सजीव चित्रण करने में लेखक सफल रहा है । 
“अवारा लड़का “ कुछ बड़े होते लड़के की कहानी,गाँव देहात में किस तरह लड़कों पर बंदिंशे होती हैं,पिता का डर,
माँ की ममता और बच्चे के सपने। 
दोस्त, मौज मस्ती पर।  घर से इजाज़त नहीं,वहीं निक्म्मा लड़का जब शहर जाकर काम करता है तो लोगों की और घर वालों की भावनाएँ कैसे बदलती हैं, बहुत ही सुलझे सरल भाव व शब्दों में बुनी गई है । “ गुलेल का निशाना “जैसा की शीर्षक से ही मालुम पड़ता है कि कहानी का ताना बाना गुलेल के इर्द गिर्द रहेगा। गुलेल गाँव में बच्चो का प्रिय हथियार होता है । 
गुलेल का निशाना  में प्राणी के जीवन की रक्षा करने का संदेश भी निहित है । पंछी को हानि न मिले यह ध्यान रखना व मानवता की सीख भी है प्रेरणा दायक कहानी । “ बालपन “ बालपन में बच्चों की बालपन की शरारतें धमाचौकड़ी, पेड़ पर चढ़ना फल तोड़ना आदि सुलभ कोमल शरारतें मरकहिया भैंस  चाची को बचाना , अम्माँ  से अपना बालसुलभ अंदाज में बात करना, बहुत सुदंर व संदेशात्मक कहानी अब आते है “पेड़ा बाबा की कृपा”। यहाँ कोई बाबा नहीं है, परन्तु एक चतुर चालाक लड़का है। जो मासूम बच्चे को फुसलाता है और चोरी करवा कर मेले का आन्नद  लेता है। वह बच्चों में लालच पैदा कर उनसे घर से पैसे मँगवाता है और ऐश करता है । यह भी शिक्षाप्रद कहानी है । रोचक और मनोरंजक कहानी संग्रह के लिये पवन जी को बहुत बहुत बधाई व शुभ आशीष किताब पढ़ कर लगा जैसे लेखक  ने अपने जीवन के यथार्थ को जिया है इन कहानियों में ,यह उसके जीवन के भोगे हुये पल हैं। पीड़ा है। इस कहानी संग्रह के ज़ोर शोर से चर्चा होगी ...यह मेरा मानना है ।लेखक इस कहानी संग्रह से तमाम लोगों में चर्चा में आयेगा ।सुदंर भविष्य की शुभकामनाओं के साथ लेखक की कलम को नमन 


अलका पाडेंय (अगनिशिखा मंच)
देविका रो हाऊस प्लांट  न.७४ सेक्टर १
कोपरखैराने  नवि मुम्बई च४००७०९
मो.न.९९२०८९९२१४
ई मेल alkapandey74@gmail.com


 



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