सावन का महत्व-अलका




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सावन का कानो में पड़ते ही एक खुशनुमा तंरग बदन में हलचल मचा देती है यह मौसम सभी को भाता है, क्यो की झुलसा देने वाली गर्मी और उमस के बाद सावन की ठंडी बयार सबको भली लगती है। कभी रिमझिम हल्की फुहार कभी घनघोर घटाओं का खूब बरसना, सारी प्रकृति धुल कर निखरी सी लगती है। हर तरफ हरियाली ही हरियाली नजरआती है । 
प्रकृति की सुन्दरता मन मोह लेती है, सचमुच उपरवाले से बड़ा कोई चित्रकार नहीं| नीले आकाश में इन्द्रधनुष देखकर सभी  बच्चे खुश होते हैं वैसे  ही हर उम्र के लोग प्रफुल्लित होते है ! ये मौसम सभी के तन-मन को ताजगी का अहसास कराती है। ऐसा कोई भी नहीं होगा जो इस सावन के हसीं मौसम में खुश न हो। सावन कई त्योहारों को लेकर आता है जैसे- हरियाली तीज, नागपंचमी और रक्षा बंधन। कहा जाता है कि सावन महीना जीवन साथी और भाई दोनों के लिए खास महत्व रखता है। सावन के साथ अक्सर हर कोई अपने जीवन से जुड़े खास लम्हों को याद करता है। बारिश की फुहारों को देख कर किसका मन नहीं मचल जाता होगा, पानी की बूंदों को छूकर हम बचपन की हसीं यादों, मिट्टी की सोंधी खुशबू में खो जाते है। कोई भी व्यक्ति चाहे वो किसी भी उम्र का हो उसके अन्दर एक मासूम बच्चा होता है जो बारिश में भीगने को मचल जाता है। अगर किसी इन्सान को इस सुहाने मौसम में ख़ुशी महसूस न हो इसका मतलब वो जिंदगी जी नहीं रहा बल्कि ढो रहा है। यह वह जिदंगी सेनिराश है या प्यार में बुरी तरह चोट खाया है , अगर बारिश में आप घर में हैं या कहीं भी हैं एन्जॉय कीजिये।जिंदगी जिए सावन के खुशनुमा मौसम में प्रेमी प्रेमिका हर जगह विहार करते मिल जायेगें।


आईए जानते है सावन की कुछ महत्वपूर्ण बातें .....
सावन को साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस माह का प्रत्येक दिन किसी भी देवी-देवता की आराधना करने के लिए सबसे उपयुक्त होता है, विशेष तौर पर इस माह में भगवान शिव, माता पार्वती और श्री कृष्ण की आराधना की जाती है। ... हिंदू परिवारों में सावन को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण महीने के तौर पर देखा जाता है।हिन्दू परिवारों में सावन को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण महीने के तौर पर देखा जाता है। इसकी महत्ता इसी बात से समझी जा सकती है कि सावन के माह में मांसाहार पूरी तरह त्याज्य होता है और शाकाहार को ही उपयुक्त माना गया है। इसके अलावा मदिरा पान भी निषेध माना गया है। लेकिन ऐसा क्या है जो सावन के माह को इतना विशिष्ट बनाता है?हिन्दू धर्म, अनेक मान्यताओं और विभिन्न प्रकार के संकलन से बना है। हिन्दू धर्म के अनुयायी इस बात से अच्छी तरह वाकिफ़ रहते हैं कि हिन्दू जीवनशैली में क्या चीज अनिवार्य है और क्या पूरी तरह वर्जित। यही वजह है कि अधिकांश हिंदू परिवारों में नीति-नियमों का भरपूर पालन किया जाता है।
हालांकि मॉडर्न होती जीवनशैली और बाहरी चकाचौंध के चक्कर में लोग अपने वास्तविक मूल्यों को दरकिनार कर चुके हैं। उदाहरण के लिए नवरात्रि को ही ले लीजिए, शायद ही कोई ऐसा घर हो जहां नवरात्रि के दिनों में मांस, मदिरा का सेवन किया जाता है। ऐसा ही कुछ सावन में भी देखा जाता है।चैत्र के पांचवे महीने को सावन का महीना कहा जाता है। इस माह के सभी दिन धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्व रखते हैं। गहराई से समझा जाए तो इस माह का प्रत्येक दिन एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है।सावन को साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस माह का प्रत्येक दिन किसी भी देवी-देवता की आराधना करने के लिए सबसे उपयुक्त होता है, विशेष तौर पर इस माह में भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है।कहा जाता है कि जिस तरह इस माह में कीट-पतंगे अपनी सक्रियता बढ़ा देते हैं, उसी तरह मनुष्य को भी पूजा-पाठ में अपनी सक्रियता को बढ़ा देनी चाहिए। यह महीना बारिशों का होता है, जिससे कि पानी का जल स्तर बढ़ जाता है। मूसलाधार बारिश नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए शिव पर जल चढ़ाकर उन्हें शांत किया जाता है।
महाराष्ट्र में जल स्तर को सामान्य रखने की एक अनोखी प्रथा विद्यमान है। वे सावन के महीने में समुद्र में जाकर नारियल अर्पण करते हैं ताकि किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंच पाए। एक पौराणिक कथा धार्मिक हिन्दू दस्तावेजों में मौजूद है जिसके अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान करने से भगवान शिव के शरीर का तापमान तेज गति से बढ़ने लगा था।
ऐसे में शरीर को शीतल रखने के लिए भोलेनाथ ने चंद्रमा को अपने सिर पर धारण किया और अन्य देव उन पर जल की वर्षा करने लगे। यहां तक कि इन्द्र देव भी यह चाहते थे कि भगवान शिव के शरीर का तापमान कम हो जाए इसलिए उन्होंने अपने तेज से मूसलाधार बारिश कर दी। इस वजह से सावन के महीने में अत्याधिक बारिश होती है, जिससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव के भक्त कावड़ ले जाकर गंगा का पानी शिव की प्रतिमा पर अर्पित कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयत्न करते हैं। इसके अलावा सावन माह के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव पर जल चढ़ाना शुभ और फलदायी माना जाता है। सावन के महीने में व्रत रखने का भी विशेष महत्व दर्शाया गया है। ऐसी मान्यता है कि कुंवारी लड़कियां अगर इस पूरे महीने व्रत रखती हैं तो उन्हें उनकी पसंद का जीवनसाथी मिलता है। इसके पीछे भी एक कथा मौजूद है जो शिव और पार्वती से जुड़ी है।
पिता दक्ष द्वारा अपने पति का अपमान होता देख सती ने आत्मदाह कर लिया था। पार्वती के रूप में सती ने पुनर्जन्म लिया और शिव को अपना बनाने के लिए उन्होंने सावन के सभी सोमवार का व्रत रखा। फलस्वरूप उन्हें भगवान शिव पति रूप में मिले।
यह सब तो पौराणिक मान्यताएं हैं, जिनका सीधा संबंध धार्मिक कथाओं से है। परंतु सावन के महीने में मांसाहार से क्यों परहेज किया जाता है इसके पीछे का कारण धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक भी है।दरअसल सावन के पूरे माह में भरपूर बारिश होती है जिससे कि कीड़े-मकोड़े सक्रिय हो जाते हैं। इसके अलावा इस मौसम में उनका प्रजनन भी अधिक मात्रा में होता है। इसलिए बाहर के खाने का सेवन सही नहीं माना जाता।पशु-पक्षी, जिस माहौल में रहते हैं वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान नहीं रखा जाता, जिससे कि उनके भी संक्रमित होने की संभावना बढ़ती है। इसलिए मांसाहार को वर्जित कहा गया है।आयुर्वेद में भी इस बात का जिक्र है कि सावन के महीने में मांस के संक्रमित होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है, इसलिए इस पूरे माह मांस-मछली या अन्य मांसाहार के सेवन को निषेध कहा गया है।
सावन के महीने को प्रेम और प्रजनन का महीना कहा जाता है। इस माह में मछलियां और पशु, पक्षी सभी में गर्भाधान की संभावना होती है। किसी भी गर्भवती मादा की हत्या हिन्दू धर्म में एक पाप माना गया है इसलिए सावन के महीने में जीव को मारकर उसका सेवन नहीं किया जाता।दरअसल सावन का महीना भगवान शंकर को काफी पसंद है। इसलिए भक्तजन इस महीने में व्रत रखते हैं। इस महीने में सावन स्नान की परंपरा है, जिसे पिछले कई दशकों से लोग निभाते हुए आ रहे हैं। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा के दौरान बेल पत्र से पूजा-अर्चना की जाती है और जल चढ़ाया जाता है। ज्योति लिंग के दर्शन करने जाते है । सावन पवित्र महिना है 



डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई


 



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