मुद्दत से-मेघा

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मुद्दत से किया हैं हमने इन्तजार तुम्हारे आने का 
ना चलेगा कुछ भी जोर अब किसी बहाने  का
जो तू फ़िर रूठ गया हैं 
कर रही हू एक प्रयत्न फ़िर से तुझे मनाने का ,,,


बचा नही है समय अब देखो जरा कुछ भी गवाने का 
सहारा देख रही हैं चिड़िया घर अपना बनाने का 
चलेगा नही अब जोर हवा का 
रोक ना सके कोई रास्ता उसके यहा पर आने का,, 


जरा जरा मे बात ना होती मन विचलित हो जाता हैं 
मन के अन्दर एक बवंडर जरा भी सम्भल ना पाता हैं 
तू  रूठा तो मेरा रब है रूठा 
किया है वादा एक दूजे से हर दम साथ निभाने का,, 


मेघा मिश्रा,,,,, 
नरसिंहपुर मध्यप्रदेश
न. 9713505954



 


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