क्‍यों चुपचाप सहते हैं-अमिता

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सरासर हो रहा अन्याय,
क्यों चुपचाप सहते हम?
 वीरों का जज्बा कौशल
दुर्गम पहाड़ी पर चढ़कर
गूंजा गलवान घाटी पर
अपना अस्तित्व भूलकर
कलियां उनके लिए
गिराना थोड़ी लाकर


जो दिखायें आंख हमें
कुचले गर्व का मस्तक
अभिमान को दे जवाब
जो बलिदान होते मां पर
कलियां उनके लिए
गिराना थोड़ी लाकर


अपना तन,मन,धन,
सब इस देश के थाती
जीतें  सर्वस्व लुटाकर
देश का सम्मान बचाते
गौरव शाली वीरों पर
कलियां उनकेे लिए
गिराना थोड़ी लाकर


जीना हैं‌ हमें शान से
 करेंगे कड़ा सामना
मिसाल भी ऐसी रखें
कभी न उठाये शीश अपना
जो शहीद हुए मेरे लाल
उनकी शौर्य गाथा पर
कलियां उनके लिए
गिराना थोड़ी लाकर


तन से नहीं ये धन्य वीर
शहादत से हुए रोशन आज
गाते जायें इनका गुण गान
समर्पण की भावनाओं पर
कलियां इनके लिए
गिराना थोड़ी लाकर


अमिता मराठे
इन्दौर
मौलिक


 



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