एक मेरा ऐसा चित्र बना दे-किरण

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मेरी सर्वश्रेष्ठ रचना

चितेरे !
एक मेरा ऐसा चित्र बना दे 
जो मन मानस में करुणा उपजा दे
 लहू बहता हो माथे से 
जकड़े हों हाथ जंजीरों से 
एक मेरा ऐसा चित्र बना दे 
धड़ पांव भुजा सर अलग-अलग हों 
रक्त-रंजित वस्त्र फटे हुए हों
गगन में बादल धूल भरे हों
एक मेरा ऐसा चित्र बना दे 
गिद्ध कौवों का हुजूम लगा हो 
गधों के सिर पर ताज सजा हो
खेत खलियान झुलस रहे हों
बूॅ॑द-बूॅ॑द को तरस रहे हों
एक मेरा ऐसा चित्र बना दे
नैनों में रक्तिम अश्रु हों
चहुॅ॑ ओर जहाॅऺ॑ शत्रु हों
जीवन से सहज मरण जहाॅ॑ हो
सत्य पर मिथ्या का आवरण चढ़ा हो
एक मेरा ऐसा चित्र बना दे 
तमाशबीनों की बस्ती हो 
अस्मत सरेआम जहाॅ॑ लुटती हो 
धर्म के नाम पर व्यभिचार जहाॅ॑ हो 
रिश्तो में व्यापार छिपा हो 
एक मेरा ऐसा चित्र बना दे 
क्योंकि मैं हूं तुम्हारा प्यारा भारतवर्ष
है जो आज मजबूर बेबस 
बना माध्यम अपने चित्रों को 
मेरी वाणी जन जन तक पहुॅ॑चा दे 


चितेरे !
एक मेरा ऐसा चित्र बना दे 
जो मनमानस में करुणा उपजा दे 
     
--- किरण बाला, चंडीगढ़
    9803564330


 



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