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सर्वश्रेष्ठ रचना
रख हौसला हिम्मत मत हार
वो मंजर भी आयेगा ।
प्यासे के पास चलकर
खुद समंदर भी
आयेगा ।
मै मानता हू परेशान है ।
मानव एक महामारी से
तू चल आत्मनिर्भर बन
यू थक हार कर
ना बैठ ।
ये वायरस हमे
जल्द छोड़कर जायेगा
निराशाओ को धुल मे
मिलाकर कर
जो आशाओ को
जिला देते है ।
बन आत्मनिर्भर मानव
तुम उसरो मे भी
कमल खिला देते ।
मुश्किल नही जो
ठान लिया जाय ।
कहिये तो आसमा को
जमी पे उतार लिया जाय
मुश्किल है ।
खिलेगा सूरज एक दिन
आत्मनिर्भर से
इसको पहचान
लिया जाय ।
इन्ही गम के घटाओ मे
चाॅद निकलेगा
अन्धेरी रात के
परदे मे
एक दिन रौशनी का
उन्माद निकलेगा ।
उपेंद्र अजनबी
सेवराई गाजीपुर उ प्र
मो - 7985797683
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