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चीन तू तो निकला बहुत ही विश्वासघाती है।
छुरा घोंपता पीठ में और बताता साथी है।।
सीमा पर आकर अपना,
डेरा जमा लिया।
सिंहों की मांद में हाथ,
सिंह को जगा दिया।
समझा हमारी जमीं को क्या अपनी थाती है।
चीन तू तो निकला बहुत ही विश्वासघाती है।।
व्यापार करता है आकर,
हमारे ही देश में।
नाग बन डस रहा हमें ही,
मानव के भेष में।
भारत- वीरों के समक्ष दानवता भी थर्राती है।
चीन तू तो निकला बहुत ही विश्वासघाती है।।
छल कपट करता आया,
शस्त्र हीन पर वार करे।
यह भूमि सिंहों का डेरा,
शत्रुओं का संहार करे।
अनल विशिख बन बरसे सेना यह धूल चटाती है।
चीन तू तो निकला बहुत ही विश्वासघाती है।।
डा. साधना तोमर डी. लिट.
मधुबन कालोनी, गली नं.02
कैनाल रोड़, बड़ौत (बागपत)
उत्तर प्रदेश 250611
अखिल भारतीय अग्निशिखा परिवार
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