उठो जवानों उठो-कुमुद

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उठो जवानों उठो !
अब नौजवानों उठो देश के , हिमसीमा तुम्हें पुकार रही    
हराओ तीनों पड़ोसियों को , माँ धूल व मिट्टी बुहार रही
अब नौजवानों उठो , उठो जवानों उठो !


बर्फ की चादर लपेट के तुमको , शोलों के दीप जलाना है 
हो आँधी-पानी और बरसात , गलवान में शीश सजाना है
दुश्मनों की आँखें करके बंद , आजादी का बिगुल बजाना है
तुम अडिग , सुरक्षित , देशवासियों की खातिर , गीत गुनगुनाना है
सुन दुश्मन के बड़बोले बोल , त्रिशक्ति नेत्री माँ ललकार रही
अब नौजवानों उठो देश के , हिमसीमा तुम्हें पुकार रही   
अब नौजवानों उठो , उठो जवानों उठो !


अभी हैं छिन्नमस्ता - रणचंडी बन , राखी के नगीने चमक रहे
सजी थाल अक्षत - कुमकुम से , हैं रणभेरी के दीये दमक रहे
रणबाँकुरों हल्दी से रंगी हैं कटारें , तुम्हारे इंतज़ार में
आओ प्रहरियों ये खुला है हिमदर , प्रतीक्षित जुगनू ठुमक रहे
करती आह्वान भारत माँ , लद्दाख की घाटी हुंकार रही
अब नौजवानों उठो देश के , हिमसीमा तुम्हें पुकार रही  
अब नौजवानों उठो , उठो जवानों उठो !


जागो ओ नौजवानों बन रही सीमा पर ,अभी युद्ध की स्थिति है
रचो चक्रव्यूह औ बजाओ रणभेरी , शांति की नहीं उपस्थिति है
ये तीन तरफ से तीनों दुश्मन , पागल हो रच रहे कुटिल कूटनीति
लातों के भूत बातों से नहीं सुनते , जड़ें हिलाना परिस्थिति है
भारत माता रवि अर्ध्य देकर , लेकर मशाल टंकार रही
अब नौजवानों उठो देश के , हिमसीमा तुम्हें पुकार रही  
अब नौजवानों उठो , उठो जवानों उठो !


डॉ कुमुद बाला
हैदराबाद
8886220212


 



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