सावन में बादल बरस रहे हैं-सुरेन्‍द्र


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नैनों में  मेरे नए ख्वाब  सज रहे हैं 

जैसे दूर कहीं मृदृंग से बज  रहे  हैं 

महफ़िल  में यार -दोस्त हँस रहे हैं 

पंछी   इन  लहराते   एहसासों  के 

बीती यादों के जाल  में फँस रहे हैं 

आज सावन में बादल बरस रहे हैं 

 

अँधेरी रात है नज़र कुछ आता नहीं 

चाँद कोई  नया शगूफा बनाता नहीं 

इंतज़ार था  बाकी  सब आ  चुके हैं 

जाने मेरा महबूब  मगर आता  नहीं 

अतीत के पुलिंदे  मुझे  कस  रहे  हैं 

आज सावन में बादल बरस रहे   हैं 

 

बीते तूफान दिल में हलचल मची थी

जिस्म-उबाल तन्हाई ज़हन  बची थी

कितना अफ़सोस हुआ था सोचकर 

कभी प्रेम -कहानी हमने भी रची थी

कितने  सारे  लम्हे   बरबस  रहे   हैं 

आज सावन में बादल बरस  रहे  हैं 

 

हर  आहट पर दिल मेरा नोचता  था

वो  ही  होंगे  बस  यही  सोचता  था

मगर  उनका ना आना जैसे  तय था 

यही सोचकर तो दिल मेरा टूटता था 

हर बार "उड़ता" तेरे  मजस^ रहे  है.(व्यस्त काम )

आज सावन में बादल बरस  रहे  हैं 

 

 

 

द्वारा - सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता "

713/16, छावनी झज्जर 

पिन -124103 (हरियाणा )

 

संपर्क +91-9466865227

 


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