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सावन में झुले झुला अपने साजन के संग।
छाये खुशिओ की लहर ओर बिखेरे अपने रंग।।
सावन में मन प्रफ़ुल्लित होता हैं ऐसे।
बन्जर भूमि में हरियाली छाई हो जेसे।।
बड़े इन्तजार के बाद आज सावन आया हैं।
लेकर मस्ती की फ़ुहार सब पर छाया हैं ।1
देखकर सुन्दरता कुदरत की मन कुछ यु झुमा हैं।
मानो किसी कुमुदनी को किसी भवरे ने चुमा हैं।।
सावन आया मन को अन्त तक भाया ।
सुन्दर लगने लगा है अपना हर साया ।।
डाले झुला ओर झुले पड़ो की छाँव में ।
हाथो में हो कंगन ओर पहने पयाल पाँव में।1
देखकर मन यु खुशनुमा हो जाता हैं ।
मन का दर्द सारा कोसो दूर चला जाता हैं।।
सावन में मन खुशिओ से भर जाता हैं ।
सुख इतना की सम्भाले ना सम्भल पाता हैं,।1
मेघा मिश्रा
नरसिंहपुर मध्यप्रदेश
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