भूतिया स्टेशन-ज्योति सिंह

साहित्य सरोज सप्ताहिक आयोजन क्रम संख्या - 2

यह कहानी दो प्रेमियों की है जो एक दूसरे से अत्यधिक प्रेम करते थे किंतु प्रेम कुछ कारण बस अधूरा रह गया रेल के पटरी पर प्रेमिका की मृत्यु हो गई इसका कारण क्या था जानेंगे इस कहानी के माध्यम से-यह कहानी माधव गांव की है, उस गांव में केशव नाम का युवक रहता था वह पूरे गांव के लिए एक मसीहा के रूप में था ।......सभी लोगों के कार्यों में आगे आकर अपना योगदान देता था गांव वाले उसे प्यार से कृष्णा बुलाते थे ," क्योंकि गांव वाले इसे कृष्ण के रूप में देखते थे देखते ही देखते हैं युवक बहुत ही सुंदर आकर्षक रूप में परिवर्तित होने लगा ।ऐसे ही एक दिन गांव के "रामू काका "को चोट लग गया और केशव उनको लेकर अस्पताल गया और उनका इलाज करने लगा जब उसने काका से बोला,"रामू काका आप बिल्कुल घबराइए मत मैं डॉक्टर को बुलाकर लाता हूं,....।जैसे ही डॉक्टर के केविन में केशव ने पैर रखा वैसे ही डॉक्ट्रिन आयुषी को देखता ही रह गया,''आयुषी बहुत ही खूबसूरत युवती थी। अपने केबिन मैं केशव को आते देख बोली।बोलिए सर क्या तकलीफ है आपको केशव कुछ मिनट तक बोला ही नहीं जैसे मानो उसकी सुंदरता को निहार रहा हो ......जब आयुषी थोड़े तेज स्वर में बोली!  हेलो, हेलो" सर क्या काम है?  आप बोल क्यों नहीं रहे हैं आप ठीक तो हैं, तब केशव ने बोला," मैं कैसे ठीक रह सकता हूं आपको देखकर, आयुषी बोली मतलब मैं समझी नहीं केशव बोला।  कुछ नहीं मेरे रामू काका को बहुत गहरी चोट आई है आप उनको एक बार देख लीजिए । आयुषी बोली चलिए ," मैं उनको देख लूं आयुषी रामू काका के चोट पर मरहम पट्टी करके दवा देकर उनका घर भेज दी .........फिर क्या था उसी दिन से केशव हॉस्पिटल का चक्कर लगाने लगा ।

एक दिन खुद को चोट लगकर केशव आयुषी के पास पहुंचा और बोला डॉक्टर साहिबा मुझे बहुत गहरा चोट लगा है और इलाज आप ही कर सकती हो .......आयुषी जैसे ही उसके चोट पर मरहम लगाने लगी तब - तक नटखट केशव और ड्रामा करने लगा दर्द होने का ...आयुषी उसे बहुत ही सरल तरीके से दवा लगा रही थी। ऐसे करते-करते एक दिन आयुषी अपने घर से हॉस्पिटल आ रही थी और उसका बहुत बुरी तरह से एक्सीडेंट हो गया केशव जो की हरदम उसके आगे - पीछे चक्कर लगाता था उसने यह देखकर तुरंत आयुषी को उठाकर उसी अस्पताल में ले गया और इलाज कराया आयुषी ने उसे धन्यवाद बोला।  किंतु केशव ने ठान लिया कि जब तक आयुषी सही नहीं हो जाती तब तक हम आपकी देखभाल करेंगे क्योंकि आपके घर वाले यहां नहीं हैं आपकी देखभाल मैं ही करूंगा और मैं अभी जाकर अपनी मां को बुलाकर लाता हूं, मुझसे संकोच हो तो मेरी मां को तुम हर बात कह सकती हो वह भी एक औरत है और एक मां भी।  आयुषी बोली !  नहीं सर इसकी जरूरत नहीं है," यहां पर काफी नर्स ,सिस्टर,  डॉक्टर हैं जो मेरी देखभाल कर सकते हैं किंतु केशव माना नहीं और अपनी मां को लाकर आयुषी से मिला दिया। उसकी मां दिनों-  रात एक करके उसकी सेवा में लग गई और लास्ट वाले दिन जब आयुषी ने अपने पास केशव को पाया तो उसे लगा कि यह लड़का मेरा जीवन साथी बनने लायक है बहुत केयर कर रहा है और लगता है हमसे प्रेम भी करता है। तभी उसकी मां ने कहा ,'" आयुषी बेटी मेरा बेटा इतना पढ़ा लिखा नहीं है फिर भी वह तुम्हारे देखभाल बहुत अच्छे से करेगा और तुम्हें पसंद करता है उसके साथ मैं भी तुम्हें अपने घर की बहू बनाना चाहती हूं आयुषी यह सुनकर थोड़ा सा सहम गयी ,,,,,,,किंतु मन ही मन बहुत शांत और खुशहाल थी कि इस दुनिया में मेरा कोई नहीं है मुझे बहुत अच्छा जीवनसाथी और मां मिलने वाली है यह सोचते - सोचते उसने केशव की तरफ देखा और बोला क्या आप हमें मेरे घर तक छोड़ देंगे ।केशव मुस्कुराते हुए बोला,""""" तुम ना भी कहती तो मैं तैयार था चलो घर...... किंतु अपने नहीं मेरे.... उसकी मां भी बोली ! '" हां बेटा अभी तुम स्वस्थ नहीं हो इसलिए हमारे घर चलो ।

केशव आयुषी को अपने घर ले गया और दोनों मां बेटे मिलकर उसकी सेवा करने लगे जब आयुषी स्वस्थ हो गई तब उसे कुछ काम के लिए बाहर जाना पड़ा किंतु आयुषी केशव को यह नहीं पता था कि यह मुलाकात,गले लगाना एक दूसरे को जी भर देखना यह सब लास्ट था। क्योंकि जैसे ही आयुषी लौट कर केशव से स्टेशन पर मिली और केशव से गले लगने ही वाली थी की उसी स्टेशन पर कुछ लोगों ने आयुषी को जान से मार दिया क्योंकि आयुषी को केशव के सिवा रोशन भी प्यार करता था और वह यह जानता था कि आयुषी हमसे कभी शादी नहीं करेगी क्योंकि वह सिर्फ केशव को चाहती है और उसी से शादी करने वाली थी।फिर क्या था रोशन के आदमियों ने केशव को भी "अधमरा" करके छोड़ दिया और वही केशव अपना दिमागी संतुलन खो बैठा और पागल हो गया। केशव की मां को .......जब यह पता चला तो वह स्टेशन पर केशव से मिलने आई  किंतु केशव रोता- हंसता आयुषी का नाम ही लेता बोला मेरी आयु सी आयेगी और मुझे गले लगायेगी । यह दृश्य देख मां जैसे अपना आपा खो रही थी रोते हुए केशव को घर लेकर आई।  केशव गांव भर पागल- बन घूमने लगा और ठीक 12:00 बजे रात को उसी स्टेशन पर आकर बैठ जाता था मानो आयुषी उसके बगल में आकर बैठ रही हो और ढेर सारी बातें मध्य रात्रि आयुषी से करता था।मध्य रात्रि में कोई भी उस स्टेशन के पास नहीं जाता था क्योंकि जो भी केशव और आयुषी के बीच में आता था आयुषी उसे मार डालती थी क्योंकि लोगों को देखकर केशव घबरा जाता था और इधर-उधर भागने लगता था जिससे उन दोनों की बातें पूरी नहीं हो पा रही थी इसलिए आयुषी मध्य रात्रि में आने वाली यात्रियों को परेशान करने लगी और उस स्टेशन का नाम रख दिया गया भूतिया स्टेशन।।


ज्योति  सिंह 

वाराणसी ( उत्तर- प्रदेश)87368 43807



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ