आकाश और रागिनी-संजय 'सरल'

 साहित्‍य सरोज साप्‍ताहिक आयोजन क्रम संख्‍या-2 

आकाश और रागिनी को शादी के बंधन में बंधे हुए कोई पांच साल हो गए थे ।‌ पर वे अभी तक संतान सुख से वंचित थे । शुरू शुरू में देसी नुस्खे और टोटके आजमाए गए पर फिर भी बात न बनी तो आखिर मैडिकल सहारा लिया गया । जांच पड़ताल में पता चला कि रागिनी मेडिकली गर्भ धारण करने में सक्षम नहीं है । रागिनी को डाक्टर ने जब बताया तो उसके पैरों से जमीन खिसक गई । वह कुछ भी बोल न सकी बस उसकी आंखों से आंसू टपकते रहे । आकाश ने झट से उसके आंसू पोंछे और गले से लगा ढांढस बंधाया । वह फूट-फूट कर रोने लगी ।    ' हम चंडीगढ़ या दिल्ली में बड़े से बड़े हस्पताल में जा कर जांच करवाएंगे । तुम निराश क्यों होती हो  ? " आकाश ने उसे समझाया । वह चुपचाप घर की ओर चल पड़े । आकाश ने रागिनी को घर में किसी को भी कुछ भी बताने से मना कर दिया । उसको शक था कि घर के बुजुर्ग रागिनी को दोषी मान कर उसको बुरा-भला कह देंगे । और तो और वे उसे आकाश को दूसरी शादी के लिए उकसा सकते हैं ।   रागिनी ने पति का कहना मानते हुए घर में कुछ भी नहीं बताया और पहले की तरह ही बर्ताव करती रही । दिन भर वह घर के कार्यों में व्यस्त रहती पर रात आने पर वह टूट जाती । आकाश उसका खुश रहने की सलाह देता और शीघ्र ही बड़े हस्पताल में जाने का आश्वासन देता । आकाश एक कारोबारी था । वह पुश्तैनी व्यवसाय के साथ-साथ अपना अलग व्यवसाय भी करता था । काम का विस्तार काफी ज्यादा था । दो-तीन नौकर भी रखे थे । पर उनके भरोसे व्यवसाय को छोड़ जाना नुक़सानदायक हो सकता था । आकाश ने रागिनी की खातिर भावी नुक़सान के वावजूद चंडीगढ़ हस्पताल में जाने का प्लान बनाया और रागिनी को तैयारी करने को बोल दिया । 

          दो दिन के बाद वे चंडीगढ़ हस्पताल में जाने के लिए वे रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए । ट्रेन आने में अभी समय था । वे एक बेंच पर बैठ गए । ' यदि वहां भी यही सच हुआ तो ? ' रागिनी को अभी भी चिंता सता रही थी । पर आकाश आश्वस्त था ।‌ उसे विश्वास था कि कुछ न कुछ हल जरूर निकल आएगा । थोड़ी देर बाद ट्रेन आई ते वे उस पर सवार होकर चंडीगढ़ रवाना हो गए । वहां पर नामचीन हस्पताल में रागिनी की मैडिकल जांच-पड़ताल करवाना शुरू करवा दिया । सभी आधुनिक टेस्ट करवाए गए । नतीजा वही निकला , ' रागिनी मां बनने में असमर्थ है ' । रागिनी पूरी तरह टूट चुकी थी पर आकाश ने उसको भरोसा दिलाया कि वह उसका किसी भी कीमत पर साथ नहीं छोड़ेगा । उसने एक बच्चा गोद लेने का निर्णय ले लिया । उसने उधर से ही अपने एक मित्र से इस बारे में बातचीत की और जल्दी ही बच्चा ढूंढने को कहा । वह चंडीगढ़ हस्पताल से सीधे अपने उस मित्र के पास चले गए । कुछ दिनों की भागदौड़ के बाद उन्हें एक परिवार से मुलाक़ात हुई जो रागिनी की मनोदशा और बच्चे का उज्जवल भविष्य देख अपना नवजात शिशु उनको सौंपने के लिए तैयार हो गया । कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के उपरांत वे नवजात शिशु को लेकर अपने घर वापस आ गए । बुजुर्गों को कुछ कहने का मौका ही न मिला । घर में आकर रागिनी ने सभी प्रचलित रस्में निभाईं । रिश्तेदारों और दोस्तों ने भी उनको बधाई और शुभकामनाएं दीं । अब रागिनी का अधिकतर समय बेटे की देखभाल में गुजर जाता था और वह अपने सब दुख-तकलीफ भूल चुकी थी । आकाश भी निश्चिंत हो अपने व्यवसाय में लग गया था ।

संजय 'सरल'
ऊधमपुर , जम्मू-कश्मीर

94196 47096



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