यूं तो मन में ढेरों बातें प्रतिदिन प्रति मिनट प्रति सेकंड चलती रहती है। मन तो हमारा एक चंचल पतंग की भांति है जो कभी ठहरता ही नहीं मन को काबू कर पाना बहुत ही कठिन काम है। हम कितना ही प्राणायाम कर ले या मेडिटेशन कर ले परंतु कुछ देर के लिए ही हम मन को मुट्ठी में कर पाते हैं और अगर थोड़ी देर पकड़ भी लिया तो फिर से 1 मिनट में वो फुर हो जाता है और पता नहीं कब पूरी दुनिया बिना टिकट के घूम आता है मन में ढेरों विचार आते और जाते रहते हैं कुछ लिखने का मन बहुत दिनों से था सोचा आज लिखती हूं बहुत पुराना शौक है मेरा मगर कोई स्थाई जगह या मंच यूं कहो नहीं मिल रहा था आज मौका मिला है मन की बात कहने का और मन चाहता है कोई बड़े प्यार से उसे पढ़े और सराहे और बाहें पसारे आपका लगातार स्वागत करता रहे और वो मुझे मिल गया प्यार भरा साथ सरोज साहित्य का जैसे एक मां अपने आंचल फैलाए रखती है तब तक जब तक उसका बच्चा दौड़ कर उसकी गोद में ना समा जाए और मेरे मन की बात पूरी हुई और आज मैं और बेहतर लिख पा रही हूं आपका हार्दिक आभार।
शिल्पा अरोड़ा विदिशा मध्यप्रदेश
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