मजदूर दिवस पर प्रीति

मजदूर दिवस पर विशेष


श्रमिक वर्ग के श्रम से ही सिंचित जीवन वृक्ष,
नतमस्तक प्रत्येक जन उनके उद्यम के समक्ष,
अपने उद्यम से धरा को स्वर्ग बना देते हैं,
धन का मूल्य कुछ नहीं श्रम के समकक्ष।


बहुमंजिला इमारतों के निर्माता मजदूर,
कर्म लेखनी से स्वयं के भाग्य विधाता मजदूर,
 अथक परिश्रम के बल पर,नग्न पग चल-चलकर,
चार पाई स्वाभिमान की कमाता मजदूर।


लहू पसीना बहाकर अर्जित करना तनिक धन,
जीवन के चक्रव्यूह में उलझा हुआ है मन,
प्रत्येक मौसम को सहर्ष स्वीकार करता है,
सहस्त्र झंझावातों को झेलकर भी नहीं थकता तन।


असम्भव है करना इनकी सामर्थ्य का  गुणगान,
सभी वर्गों में श्रेष्ठ है श्रमिकों का स्थान,
आदर की दृष्टि से देखें श्रमिक वर्ग को हम,
इनके सफ़ल प्रयासों से बनेगा राष्ट्र महान।


ग्रीष्म के थपेड़ों से जब आम जन झुलस जाता है,
इनका फौलादी तन तनिक विश्राम नहीं पाता है,
प्रस्तरों में भी राह बना लेते हैं श्रमिक,
इनके सानिध्य से पत्थर मोम बन जाता है।


कर्म ही पूजा है, कर्म ही इनका ईश्वर,
बनते प्रत्येक के लिए ये छायादार तरुवर,
कर्तव्यनिष्ठ , परिश्रमी, लगनशील हैं श्रमिक,
 माणिक्य, मोती असंख्य वारी इनके जज़्बे पर।


इनकी कर्तव्यनिष्ठा पर संदेह नहीं कर सकते,
कंपकपाती सर्दी,भीषण ग्रीष्म से ये नहीं डर सकते,
कर्तव्य पथ पर अनवरत बढ़ते हैं इनके कदम,
इनके अस्तित्व बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते।


आओ काव्य कलम से हम इनका सम्मान करें,
समाज को गति देने वाले श्रमिकों का कल्याण करें,
आगे बढ़ने के इन्हें पर्याप्त दें हम अवसर,
शोषित न हो श्रमिक कोई, इनका उत्थान करें।


पूर्ण समर्पण भाव से करें ये कार्य सम्पादन,
साँज्जली करते हम इन देवदूतों का अभिवादन,
 आज श्रमिक दिवस पर इनको शब्द प्रसून भेंट करते हैं,
इनके शोणित से बरसता प्रेम सुधा का घन।


प्रीति चौधरी "मनोरमा"
जनपद बुलन्दशहर
उत्तरप्रदेश



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