उसकी इनकार में भी इज़हार चाहता है।
वह दीवाना भी ना जाने क्या चाहता है।।
उसे इनकार नहीं है अपनी मोहब्बत से।
पर उसकी ना में भी इकरार चाहता है।।
वो करता है उससे अपने दिल की हर बात।
उसकी खामोशी में भी अल्फ़ाज़ चाहता है।।
शांत, सरल, सादगी से भरी हुई वो लड़की।
उसमें वो शोख,चंचल सी लहर चाहता है।।
वो चुपचाप, गुमसुम सी रहती है वो लड़की।
उसमें वो अपनी खोई हुई गज़ल चाहता है।।
मयखानों में जाते हैं लोग नशे की खातिर।
उसकी नजरों में वो,वही असर चाहता है।।
स्वरचित (मौलिक)
सोनी बरनवाल ''कशिश''
जमुई, बिहार
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