फैसला-शशि सराफ

 साहित्य सरोज पत्रिका साप्ताहिक लेखन प्रतियोगिता 02 

रीता और सुरेश दूर खड़े बस एक दूसरे को निहारे जा रहे थे । तभी नदी की आत्मा थर्रा उठी ...ये जोड़ा... ये तो वही जोड़ा है जो अभी हाल में कुछ वर्षों पहले इसी पुलिया को पार कर  एक दूसरे से कसमें वादे किया करते थे ,और आज न कोई जोश न उमंग , इतने दूर खड़े है... एक दूजे से, जैसे कोई अजनबी । नदी की लहरे पुलिया से टकरा कर संदेश देना चाह रही थी आओ हमारी ठंडी लहरों के अहसास में दोनों पहले की भांति समा जाओ एक दूजे में । नदी का कोलाहल उनके भीतर के उद्वेग से अंजान था ।  प्रकृति की हरतिमा अपने चरम पर थी, हवाओं के वेग से मिल पत्तों का मीठा संगीत सुना रही थी पर वे भी मायूस निहार ही सकती थीं उनको । पुलिया का प्रतिबिंब जल के वेग से हिल हिल मानो पुकार रहा था ए युगल तुम दोनों एक दूजे के लिए ही बने हो, ना एक दूजे से दूर रहो । प्रकृति के संदेश से अनभिज्ञ रीता आंखों में आंसू लिए मन ही मन उस दिन को कोस रही थी ,जब उसने  सब सहेलियों और उनके फेओंसी के संग 3 दिनों का मनाली घूमने का प्रोग्राम बनाया था ।

रीता ..हैलो  सुरेश  शुक्रवार को हम सब सखियां और उनके फेयोंसी के संग मनाली जाने का प्रोग्राम तय किया है तुम चलोगे ना ? देखो ना मत करना मैने बिना तुमसे पूछे ही लिस्ट में तुम्हारा नाम भी दे दिया है ।

सुरेश.. मां पापा ने इजाजत दे दी है क्या ? अभी सिर्फ मौखिक बात फाइनल हुई है शादी की , कही कोई ऊंच नीच हो गई तो ? उसकी कीमत दोनों के परिवारों को चुकानी पड़ सकती है । 

रीता.. देखो इतना विश्वास अगर अब ना कर सकी तो सारी जिंदगी कैसे कर सकूंगी।

 शुक्रवार की सुबह, सब साथ मनाली के सबसे सुंदर होटल में पहुंच चुके थे, नाश्ते की टेबल पर सबने ट्रैकिंग का प्लान बनाया । सब खुशी खुशी पूरे साजो सामान के साथ एक गाइड की मदद से 11 बजे ही पहाड़ चढ़ना शुरू किया ,क्योंकि गाइड ने कहा था कि शाम होने से पहले नीचे भी आना होगा ।

 कुछ दूर चढ़ाई के बाद अचानक मौसम पलटने लगा हवा के झोंके तेज होने लगे ,गाइड ने ऊंची आवाज में बोला कि वापस चले , बारिश के आसार हो रहे है,पर सबने कहा इतनी अच्छी हवा ,इतना अच्छा माहौल जाने कब फिर मिले और उसकी बात सुनने से इनकार कर दिया । अचानक मोटी मोटी बूंदों से बारिश शुरू हो गई। हड़बड़ाहट में सब नीचे उतरने लगे ....धड़ाम ..आवाज आई, कुछ दूरी के पहले रीता के हाथों से रस्सी छूट चुकी थी और वह गिर कर बेहोश हो गई थी।

अस्पताल में आंख खुली रीता की , उसके  ससुराल वाले और मां पापा सुरेश सब उसको चिंतित नजरो से देख रहे थे । अचानक डॉक्टर ने इशारे से घर वालों को केबिन में आने का इशारा किया । दोनों पिता जब केबिन में दाखिल हुए तो उन्होंने कहा कि एक महिला को भी बुला लाए , प्राकृति ने मजाक किया है रीता के संग,एक महिला का होना जरूरी है खबर के लिए । रीता की मां चिंतित अंदर आई । डाक्टर ने कहा.. रीता को ऊपरी शारीरिक चोट तो नहीं लगी पर अंदरूनी चोट ऐसे है कि अब कभी वो मां नहीं बन सकती,   हमने सारे टेस्ट  कर लिए है ।चीत्कार कर उठी मां .. समधी ने हौसला दिया ना रोए हम है बच्चा गोद ले लेंगे रीता और सुरेश के लिए ।

ये खबर सुरेश के पिता ने घर जा कर उसके मां को जब बताई तो उसने गरजते हुए कहा अब तक मैं चुप थी छोटी जात भी सुरेश के प्यार के चलते बर्दाश्त कर लिया था, पर अब किसी की एक ना सुनूंगी, मेरे वंश के चिराग के लिए मै  किसी से भी लड़ जाऊंगी ,ये शादी मैं किसी कीमत पर नहीं होने दूंगी । अपना फैसला सुना सुरेश की मां ने दरवाजा बंद कर लिया था ।

शशि सराफ

कोलकाता

9051673787/9830726296



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