क्या यही पहला प्यार है— राधा गुप्ता

 आप यूँ ही मुझे देखते रह गए...

— राधा गुप्ता


पलकों ने जब पलकों को छुआ,

मौसम भी जैसे महकने लगा।

थम गईं साँसें, ठहर गया लम्हा,

चाँद भी बादलों में सँवरने लगा।


आपकी नज़रों में ऐसा जादू था,

कि आईना भी शर्मा गया।

मेरे दिल का हर अनकहा एहसास

आपकी आँखों में उतर गया।


न आपने इज़हार किया,

न मैंने कुछ कहा,

फिर भी धड़कनों ने

मोहब्बत का हर राज़ बयाँ कर दिया।


हवा ने मेरे आँचल से पूछा,

"क्या यही पहला प्यार है?"

मैं मुस्कुरा कर चुप रह गई,

शायद ख़ामोशी ही उसका इकरार है।


जब भी आपकी नज़रें मुझसे मिलीं,

हर दुआ रंग लाने लगी।

मेरी दुनिया की हर वीरान राह

फूलों से सजने लगी।


काश... यह पल यहीं ठहर जाता,

वक़्त भी अपना सफ़र भूल जाता।

मैं आपकी आँखों में खो जाती,

और हर जन्म बस आपका हो जाता।


न जाने आपकी नज़रों ने क्या जादू किया,

कि मेरा दिल मेरे बस में न रहा।

आप यूँ ही मुझे देखते रह गए...

और मैं उम्र भर के लिए आपकी हो गई।

— राधा गुप्ता

हावड़ा (पश्चिम बंगाल)



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