गीत नफ़रत के-अखंड गहमरी

 *साहित्य सरोज पत्रिका का साप्ताहिक लेखन प्रतियोगिता '02*



यादें तेरी मुझे क्यों रूलाती  रही।

ख्वाब में आ कर मुझको सताती रही।।


दर्द अपना किसे अब बताऊं सनम।

जब तुम्हीं मुझसे ऩजरे चुराती रही।।


बैठ कर लिख रहा था तुम्हें प्रेम पत्र।

देख मुझको तुम नज़रें चुराती रही।।


राह पथरीली मैं दिल बिछाता रहा।

ठोकरों से उसे तुम हटाती रही।।


प्यार चाहत वफ़ा इश्क की बात पर।

गीत नफ़रत के मुझको सुनाती रही।।


*अखंड गहमरी*

9451647845



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