मज़ेदार बातें,कलेजे पर पड़ती लातें.? दिनेश गंगराड़े

मैंने अपनी पत्नी से पूछा कि उसे किस तरह की किताबें,बुक पसंद हैं।उसने तत्काल कहा सही से साइन,हस्ताक्षर की हुई चेक बुक?अपनी पुरानी कार को बेहतर चलाने का सबसे आसान तरीका है, नई कारों की कीमतें देखना और जब जमे सौदा बेच दो पुरानी कार भाया,जो मिलें पो पाया,पीछा छूटे पुरानी कार का साया। एक महान सवाल,एक अच्छे वकील और एक महान वकील में क्या फ़र्क होता है?सटीक जवाब ये है एक अच्छा वकील कानून जानता है और एक महान वकील जज को भी अच्छे से जानता है।अस्पताल की नर्स की विस्तृत परिभाषा ये है एक खूबसूरत औरत जो एक पूरे पांच मिनट तक आपका हाथ पकड़ती है और फिर उम्मीद करती है कि आपकी नब्ज, पल्स,दिल की धड़कन सामान्य, नॉर्मल हो जाए?बॉस हम सफ़ाई का बहुत ध्यान रखते हैं,क्या तुमने अंदर आते समय मैट(कालीन) पर पैर पोंछे थे? नया कर्मचारी हाँ, सर।

बॉस हम सच्चाई का भी ध्यान रखते हैं।वहाँ कोई कालीन,मैट नहीं है।रोचक तथ्य,सवाल कुत्ते शादी क्यों नहीं करते?जवाब क्योंकि वे पहले से ही कुत्तों वाली ज़िंदगी जी रहे हैं,होते भी कुत्ते ही है, निचोड़ ये है कि कुत्तों को शादी नही करनी चाहिए, क्या?सवाल माँ और पत्नी में क्या समानता है?जवाब एक औरत तुम्हें रोते हुए दुनिया में लाती है और दूसरी यह पक्का करती है कि तुम पूरी ज़िंदगी रोते रहो,वो रुलाती रहती है, तुम इस मीठी मुसीबत को  लते,भोगते,भिड़ते रहो?एक अच्छी सेक्रेटरी और एक पर्सनल सेक्रेटरी में क्या फ़र्क है?एक कहती है "गुड मॉर्निंग, बॉस"।

दूसरी कहती है "सुबह हो गई, बॉस।हमेशा मुस्कुराते रहो,खुश,मस्त रहो।प्रश्न था नफरत क्या होती है?उत्तर में एक छोटी स्टोरी याद आ गई, जरा देखें,सत्तर के दशक में मित्र बोंदर का रिश्ता परिवार वालों ने समाज मे एक देहाती लड़की से कर दिया, जबकि बोंदर का दिल कहीं ओर अटका हुआ था।बोंदर किसी जानकी में अटका होकर अपनी "जान"दे चुका था।काफी जद्दोजहद ,परिजनों के भारी दबाब के बाद शादी की तारीख तय हुई।बोंदर के यार,दोस्त बेहद खुश हुए लेकिन बोंदर ने कहा ये मेरे मौत का दिन है।विवाह के दिन मेरा जनाजा निकलेगा?अंततः विवाह हुआ।कई यार आये,कुछ नही भी?विदाई के बाद भाभी जी ,बोंदर के कार्यस्थल पर आ गई।नफरत तब भी बरकरार थी।बोंदर अब भी जानकी की जान में अटका हुआ था।उधर परिजन बोंदर को बार-बार समझाने का प्रयास कर रहे थे।एक वरिष्ठ मित्र बैजू उसे सही दिशा,निर्देश दे रहा था किंतु अब भी अपनी ब्याहता पत्नी से सख्त नाराज था।एक दिन पत्नी को तीसरी मंजिल से नीचे फेकने की घातक चेतावनी तक दे डाली।सब सकते थे और बोंदर नफरत के जंजाल में?नफरत बढ़ रही थी उधर दांपत्य जीवन भी सरक रहा था।तकरीबन बीस साल बाद बोंदर पांच बार,दो पुत्र,तीन पुत्रियों का पिता बना।ये रहा घोर नफरत का सुपरिणाम?यार लोग अब कहते है ऐसा रहा भारी नफरत का प्रदर्शन ?ठेठ देहाती मित्र हर बार पूछता यार तूने बाणा का हलवा खाया क्या?मैं धीरे से बात न समझते हुए,हां करता और वो खूब भरपेट हंसता?बहुत दिनों बाद ज्ञात हुआ कि बाणा को गांव में जूते कहते है।अर्थ जानने पर मैं भी खूब हंसा?

दिनेश गंगराड़े

समरपार्क, निपानिया

इंदौर 452010मप्र




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