हर इंसान चाहता है कि उसके जीवन में कोई तो ऐसा हो जिसके सामने वो निःसंकोच अपना मन की बातें कह सके।बिना कोई कारण बताए उसके समक्ष रो सके और सामने वाला बिना किसी प्रश्न के सिर्फ उसके कंधे पर अपना हाथ रख दे। किसी का भी विश्वास प्राप्त करने का इससे बेहतर प्रयास कोई हो ही नहीं सकता। मन का खाली होना बहुत जरूरी है।मन पर पड़ा हुआ बोझ धीरे-धीरे इंसान के सुकून को दीमक की तरह चाट जाता है। मन हल्का हो जाए तो मन प्रफुल्लित हो जाता है।दिमाग सही दिशा में काम करने लगता है वैसे ही जैसे बहुत रो लेने के बाद जो भी निर्णय लिया जाता है वो व्यक्ति को सही राह पर ले जाता है ।किसी भी प्रकार का दबाव मन-मस्तिष्क को सदैव भ्रमित किए रहता है। मन ही मन घुटते रहने से कई मानसिक ग्रंथियां विकसित हो जाती है।
जाने अंजाने व्यक्ति का मन और स्वास्थ्य दोनों ही प्रभावित होने लगता है।कभी-कभी तो व्यक्ति बीमारियों का भी शिकार हो जाता है इसलिए जरूरी है अपने दोस्तों, मित्रों या फिर जिसपर भरोसा हो उसके साथ मन साझा करते रहना चाहिए। परिस्थितियों वश कभी-कभी इंसान स्वयं कोई राह नहीं चुन पाता तब दोस्त और मित्र ही काम आते हैं। दोस्त ऐसा ही होना चाहिए जैसा कि ईश्वर जिसके सामने बैठकर हम अपना मन खाली कर देते हैं और हमें ये विश्वास होता है कि बात कहीं नहीं जाएगी और रिश्ता यूँ ही बना रहेगा जैसे भक्त और भगवान का। शास्त्रों में कहा गया है कि #मौन_अगर #साधना_है_तो_दमन_विष। अपनी भावनाओं का दमन किसी भी हाल में नहीं करना चाहिए नहीं तो वो कभी न कभी हमारे ही स्वास्थ्य या मन पर बुरा प्रभाव डालेगा।
सोनी बरनवाल कशिश
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