पुस्तक चर्चा :
ब्रजेश कानूनगो की पुस्तक घर बैठे घुमक्कड़ी, यात्रा साहित्य की पारंपरिक सीमाओं का विस्तार करती है। यह केवल देशों, नगरों और प्राकृतिक स्थलों का परिचय नहीं कराती, बल्कि डिजिटल युग में यात्रा के बदलते स्वरूप का भी दस्तावेज बन जाती है। लेखक ने भूमिका में स्पष्ट किया है कि आज पुस्तकें ही नहीं, बल्कि यूट्यूब ट्रैवल ब्लॉग भी दुनिया को समझने का सशक्त माध्यम बन चुके हैं। यही विचार पूरी पुस्तक का मूल आधार बनता है।पुस्तक का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी विषय विविधता है। इसमें काउच सर्फिंग और हिच हाइकिंग जैसी आधुनिक यात्रा अवधारणाओं से लेकर सूर्योदय और सूर्यास्त के वैज्ञानिक एवं सौंदर्यात्मक पक्ष, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की खोजें, विभिन्न देशों की संस्कृति, जनजातीय जीवन, प्राकृतिक आश्चर्य, पर्यावरण, पर्यटन और मानवीय व्यवहार तक अनेक विषयों को रोचक शैली में, आम आदमी के लिए सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।इस पुस्तक को पढ़ते हुए बार बार ऐसा अनुभव होता है जैसे पाठक केवल शब्द नहीं पढ़ रहा, बल्कि किसी थ्री डी व्यू डिवाइस या आधुनिक वीआर चश्मे के माध्यम से विश्व के विभिन्न स्थलों को अपनी आँखों के सामने सजीव रूप में देख रहा हो। मुझे पिताजी के टेबल पर रखे बड़े से ग्लोब और , एटलस, रेलवे टाइम टेबल ,तथा ट्रैवलाग्स की याद बरबस आ गई, वे घर बैठे ही हमे बता दिया करते थे कि हम कहीं कैसै जाएं , कहां रुकें , क्या विशेष खाएं और क्या घूमें, उनकी दुनिया पढ़कर समझने और विजुलाइज करने वाली थी , स्मरण रखने वाली थी ।
आज जमाना बदल कर डिस्कवरी , हिस्ट्री , ट्रेवल चैनल्स , यू ट्यूब और वी आर का है। विश्व के बड़े संग्रहालय अब 3d वाक दृश्यों में सुलभ हैं।इस किताब में भी लेखक का वर्णन दृश्यात्मक है जो पाठक को मानसिक यात्रा का सहभागी बना देता है। यही इस पुस्तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।लेखक तथ्य और संवेदना का संतुलन बनाए रखते हैं। वे पर्यटन को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कृति, विज्ञान और मानवीय अनुभवों को समझने का माध्यम मानते हैं। यही कारण है कि पुस्तक ज्ञानवर्धक होने के साथ साथ जिज्ञासा भी जगाती है।यदि सुधार की कोई संभावना दिखाई देती है तो केवल इतनी कि कुछ अध्यायों में तथ्यों की सघनता अपेक्षाकृत अधिक हो जाती है। वहाँ यदि कुछ मानचित्र, रंगीन चित्र, क्यूआर कोड अथवा संदर्भित ट्रैवल व्लॉग्स के लिंक जोड़ दिए जाएँ तो पाठक का अनुभव और भी समृद्ध हो सकता है। कुछ स्थानों पर लेखक के निजी यात्रा अनुभवों की मात्रा थोड़ी और बढ़ती तो पुस्तक का आत्मीय पक्ष और अधिक प्रभावशाली बनता।
समग्रतः घर बैठे घुमक्कड़ी उन पाठकों के लिए एक उपयोगी और संग्रहणीय पुस्तक है जो बिना पासपोर्ट और बिना टिकट भी दुनिया को समझना चाहते हैं। यह पुस्तक सिद्ध करती है कि जिज्ञासु मन के लिए यात्रा केवल पैरों से नहीं, दृष्टि और कल्पना से भी की जा सकती है।मैने कहीं लिखा था कि यात्रा साहित्य की जननी होती है, वह यात्रा अब घर पर ही की जा सकती है। ब्रजेश जी को इस नई सोच वाली पुस्तक के लेखन हेतु हार्दिक बधाई तथा पाठकों को किताब खरीद कर पढ़ने का आमंत्रण।
(घर बैठे घुमक्कड़ी, लेखक : ब्रजेश कानूनगो, विधा : यात्रा वृत्तांत एवं ज्ञानपरक निबंध,
प्रकाशक : न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन, नई दिल्ली,संस्करण : 2026,पृष्ठ : 216)
विवेक रंजन श्रीवास्तव

0 टिप्पणियाँ