स्वर्गीय श्री निसुकांत तिवारी जी की पुण्य स्मृति में- डॉ शीला शर्मा

भावपूर्ण श्रद्धांजलि

कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका जीवन केवल उनके अपने परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वे अपने ज्ञान, व्यवहार और स्नेह से अनगिनत लोगों के जीवन को स्पर्श कर जाते हैं। मेरे बड़े भैया, स्वर्गीय श्री निसुकांत तिवारी जी, ऐसे ही विलक्षण और प्रेरणास्पद व्यक्तित्व थे।भैया हम छह भाई-बहनों में दूसरे क्रम पर थे। वे हमारे पूज्य पिताश्री स्वर्गीय श्री जितेंद्र कुमार तिवारी जी एवं माताश्री के संस्कारों की सजीव प्रतिमूर्ति थे। बचपन से ही उनमें अद्भुत प्रतिभा, गंभीर चिंतन और दूसरों के प्रति सहयोग की भावना स्पष्ट दिखाई देती थी। उनका व्यक्तित्व प्रभावशाली होने के साथ-साथ अत्यंत सरल और आत्मीय भी था।

एक सहायक प्राध्यापक के रूप में उन्होंने अपने विद्यार्थियों के बीच जो सम्मान और प्रेम अर्जित किया, वह किसी भी शिक्षक के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। वे केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं थे, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाले मार्गदर्शक थे। उनकी वाणी में ज्ञान था, व्यवहार में विनम्रता थी और हृदय में अपार करुणा। यही कारण था कि उनके विद्यार्थी उन्हें केवल गुरु नहीं, बल्कि प्रेरणास्रोत मानते थे।भैया का जीवन अनुशासन, संवेदनशीलता और परिश्रम का सुंदर उदाहरण था। परिवार के प्रति उनका स्नेह और जिम्मेदारी की भावना हम सभी के लिए सदैव प्रेरणा बनी रहेगी। उन्होंने हर रिश्ते को पूरे मन से निभाया और अपने व्यवहार से सभी के हृदय में विशेष स्थान बनाया।

27 मई 1994 को उनका असमय निधन हम सभी के जीवन में एक ऐसी रिक्तता छोड़ गया, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। समय बीतता गया, लेकिन उनकी स्मृतियाँ आज भी उतनी ही जीवंत हैं। उनका स्नेह, उनके शब्द, उनका मार्गदर्शन और उनका मुस्कुराता चेहरा आज भी हमारी यादों में उज्ज्वल दीपक की तरह प्रकाशित है।ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और हमें उनकी शिक्षाओं एवं आदर्शों पर चलने की शक्ति प्रदान करें।

“कुछ लोग जीवन से विदा होकर भी कभी दूर नहीं जाते,

वे अपनी स्मृतियों में सदैव जीवित रहते हैं।”

भैया, आपकी कमी सदैव महसूस होगी।

आपकी स्मृतियाँ हमारे हृदय में हमेशा अमिट रहेंगी।

भावपूर्ण श्रद्धांजलि



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