घुमक्कड़ी जो जाती नहीं-ममता

घुमक्कड़ी 

ममता बचपन से लेकर अब घुमक्कड़ी की एक स्थान से दुसरे स्थान पर जाती ही रही हैं।
सोलह वर्षीय होने के बावजूद, गाँव के बच्चों के साथ खेलती ।
कभी कैरम, लिडू,बेट मिन्टन,गुलीडंडा, पत्थर की गिट्टियों से तो कभी कैंचे।
गाँव के लोग कहते इसका बचपना कब जायेगा?
घुमक्कड़ी जो ठहरी ।
साथ की सहेलियां बड़ी हो गई लेकिन वो बड़ी नहीं हुई, घर के लोग भी सोचते कि अभी बच्ची हैं जब बड़ी हो जायेगी तो खुद ही बाहर नहीं घुमेगी।
पड़ोसी लोग कहते ...दिन भर खेलती रहती हो ,कुछ पढ़ाई लिखाई भी कर लिया करो लेकिन उसके माथे पर जूं तक न रेंगती।
जब वो सत्रह वर्ष की हुई तो अचानक से बड़ी हो गई, उसके लिए वर की तलाश करने लगे 
ममता बहुत मायूस सी रहने लगी लेकिन कहीं भी जाने की बात आती ,उसने अपनी बड़ी बहनों के घर पर डेरा डालना शुरु कर दिया था 
घूमना ,फोटोग्राफी करना ,पहाड़ी व प्राकृतिक दृश्यों को कैद करना ।
घुमक्कड़ी जो ठहरी ।
कभी चाय की टपरी पर बैठना ... चाय 
..चाय कहते हुए चिल्लाना जैसे की सच मे चाय बेचने वाली हो,कभी रिक्शे वाले से कहकर रिक्शा चलाना,हर दिन खूब मौजमस्ती वाले दिन गुजारना ।अपनी सखियों को रिक्शे पर बैठाकर खुले मैदान में एक चक्कर चला लेती ।
इस घुमक्कड़ी के कारनामे बहुत हैं।
जब भी किसी स्थान पर जाती ,वो वैसा ही रुप बना लेती थी ,कभी मंदिर की पुजारिन,तो कभी घुड़सवारी कर आती ।
कन्याकुमारी तक का सफर किया हैं ।
ममता के पिता ने घुमक्कड़ी का विवाह घुमक्कड़ के साथ कर दिया । घुमक्कड़ी के लिए बहुत आनंद था और वो अपने पति के साथ देशाटन पर जाने लगी ,
घुमक्कड़ी 

ममता बचपन से लेकर अब घुमक्कड़ी की एक स्थान से दुसरे स्थान पर जाती ही रही हैं।
सोलह वर्षीय होने के बावजूद, गाँव के बच्चों के साथ खेलती ।
कभी कैरम, लिडू,बेट मिन्टन,गुलीडंडा, पत्थर की गिट्टियों से तो कभी कैंचे।
गाँव के लोग कहते इसका बचपना कब जायेगा?
घुमक्कड़ी जो ठहरी ।
साथ की सहेलियां बड़ी हो गई लेकिन वो बड़ी नहीं हुई, घर के लोग भी सोचते कि अभी बच्ची हैं जब बड़ी हो जायेगी तो खुद ही बाहर नहीं घुमेगी।
पड़ोसी लोग कहते ...दिन भर खेलती रहती हो ,कुछ पढ़ाई लिखाई भी कर लिया करो लेकिन उसके माथे पर जूं तक न रेंगती।
जब वो सत्रह वर्ष की हुई तो अचानक से बड़ी हो गई, उसके लिए वर की तलाश करने लगे 
ममता बहुत मायूस सी रहने लगी लेकिन कहीं भी जाने की बात आती ,उसने अपनी बड़ी बहनों के घर पर डेरा डालना शुरु कर दिया था 
घूमना ,फोटोग्राफी करना ,पहाड़ी व प्राकृतिक दृश्यों को कैद करना ।
घुमक्कड़ी जो ठहरी ।
कभी चाय की टपरी पर बैठना ... चाय 
..चाय कहते हुए चिल्लाना जैसे की सच मे चाय बेचने वाली हो,कभी रिक्शे वाले से कहकर रिक्शा चलाना,हर दिन खूब मौजमस्ती वाले दिन गुजारना ।अपनी सखियों को रिक्शे पर बैठाकर खुले मैदान में एक चक्कर चला लेती ।
इस घुमक्कड़ी के कारनामे बहुत हैं। जब भी किसी स्थान पर जाती ,वो वैसा ही रुप बना लेती थी ,कभी मंदिर की पुजारिन,तो कभी घुड़सवारी कर आती । कन्याकुमारी तक का सफर किया हैं । ममता के पिता ने घुमक्कड़ी का विवाह घुमक्कड़ के साथ कर दिया । घुमक्कड़ी के लिए बहुत आनंद था और वो अपने के देशाटन पर जाने लगी ।घुमक्कड़ी बनकर बेटो के पीछे लगी रही ,अब पोती पोते के साथ घुमक्कड़ी बनकर घुमती रही। अब सर ऐसा घुमने लगा कि बिस्तर पर ही घुमती रहती हैं ।

 ममता गिनोड़िया
94356 10538

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