मजदूर दिवस पर स्मिता धिरासरिया

विश्व मजदूर दिवस पर समर्पित 


मैं हूँ मजदूर 
हालातोँ से मजबूर 
जिसने चिलचिलाती धुप में 
पत्थर तोड़ सडकें fबनाई 
चट्टान काट  
राह  बनाई 
कुआँ खोद  
प्यास बुझाई 
धरती चीर  
अन्न उगाया 
पेट के लिए है 
आज मजबूर 
मीलों कोस 
चलकर आया 
पट्टी पेट बांध 
भूख मिटाई 
ग़ैरों के लिए 
छत बनाई  
है छतविहीन  
रहने को मजबूर
  जिनका भविष्य  है 
अंधकार 
 न कोई जिंदगी मे 
बहार 
आत्मसम्मान से दूर 
हाँ मै मजदूर ,हाँ मै मजदूर


स्मिता धिरासरिया ,मौलिक  
बरपेटा रोड



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