मुस्‍कान-शुचि भवि

कौन कहता है
मुस्कान ओंठों की जागीर है
मैंने देखा है 
रोते  ओंठों और
हँसती आँखों को,
बहुत महीन सी रेखा का
होता है अंतर
ख़ुशी में
और मुस्कान में
मुस्कान वस्त्र है
और ख़ुशी देह और
आनंद आत्मा है
उस देह की
सुनो
आनंद से 
होकर ही तो आती हैं
ख़ुशी और मुस्कान 
दोंनों ही
सुनो
तुम मेरी मुस्कान नहीं
आनंद बनना,,,


शुचि 'भवि'
भिलाई,छत्तीसगढ़



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