मिला वरदान-प्रमोद तिवारी हंस

रचनाकार संख्‍या -25


मिला वरदान ये  हम को हुआ अवतार गंगा का ।
दिया है देवताओं ने हमें उपहार गंगा का ।


भगीरथ के तपोबल से उतर ब्रह्मा कमंडल से 
बना  शिव की जटाओं में नया आधार गंगा का ।


हिमालय से बढ़ी आगे चली जब सिन्धु से मिलने 
मिली जो राह में सरिता मिला आकार गंगा का ।


मिटाती पाप आयी है सभी के आज तक अविरल 
कमायें पुण्य तो हम भी न हो अपकार गंगा का।


यही  कर्तव्य है सब का बहे  निर्मल रहे  पावन 
करें हम स्वच्छ रख कर ही  उचित सत्कार गंगा का ।


प्रमोद तिवारी हंस


 




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