सागर से अंबर तक - उपेंद्र द्विवेदी

रचनाकार संख्‍या -66


कलकल कहता 
हलचल...करता 
           बहता जल 
           गँगा जल 
अम्बर से सागर 
सागर  से अम्बर 
पल पल निर्मल 
           करता जल 
           गँगा जल 
नदिया की धारा 
डगमग पथ सारा 
दुर्गम पथ की पीड़ा 
           सहता जल 
            गंगा जल 
जीवन की आशा 
रहे न जग प्यासा 
है बूँद बूँद अमृत 
            कहता जल 
            गंगा जल 


पर्वत या.. मैदान 
मीलों पथ वीरान 
कर पथ की पहचान 
         बढ़ता जल 
          गँगा जल 


कुदरत का वरदान 
सागर का अभिमान 
हुये मनुज नादान 
        हँसता जल
         गँगा जल 


तुमने मोडी धारा 
उसने तोड़ी कारा 
बंधी कभी जलधारा 
       कहता जल 
       गँगा जल 


रे बिंदु बिंदु में हूँ 
सप्त  सिंधु में हूँ 
सृष्टि का आधार 
      रहता जल 
      गंगा जल 


उपेंद्र द्विवेदी
ग्राम पोस्ट ताला , जिला सतना म .प्र


 



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