कहानी -जया

जया उच्च शिक्षित, व संभ्रांत परिवार की लड़की थी। उसका विवाह कम पढ़े लिखे लड़के से ,एक अशिक्षित परिवार में हुआ।शादी के पूर्व वह योग शिक्षिका थी। ससुराल में जब वह सुबह अपने सभी दैनिक कार्य निपटा कर पार्क में अपनी योग कक्षाएं लेने के लिए जा रही थी कि उसकी सासु माँ ने उसे रोका, "कहाँ चली सुबह - सुबह, कहीं जाने की जरूरत नहीं है!"
जया ने समझाना चाहा परंतु असफल रही। मन मारकर अपने कमरे में ही नित योगाभ्यास करने लगी। वह समय से पूर्व उठ जाती ताकि किसी को कोई समस्या न हो।
फिर भी उसकी सास बात- बात पर क्रोधित हो जातीं उन्हें बहू का योगाभ्यास करना तनिक भी न सुहाता था।
एक दिन उनकी कमर व पैर में भयंकर दर्द उठा, रात का वक़्त था। रात के समय कोई यातायात का साधन भी, उपलब्ध न था। उनका दर्द बढ़ता ही जा रहा था, तभी जया ने अपने योगा की जानकारी व अनुभव के आधार पर उन्हें तुरंत प्राथमिक आयुर्वेदिक उपचार दिए और स्वयं अपने हाथों से कुछ व्यायाम कराए। लगभग 3 दिनों में ही उन्हें दर्द में आराम मिलने लगा । उनके पास पड़ोसी भी जब उनसे मिलने आए तो उन्होंने बहू के योगा जानकारी की बहुत तारीफ की और कहा कि यह विद्या उनकी बहू को पास- पड़ोस के लोगों को भी सिखानी चाहिए।
लोगों से प्रशंसा सुनकर जया की सास अत्यंत प्रसन्न हुईं। उन्होंने स्वयं योगाभ्यास करने की ठान ली। बहू के साथ मिलकर , वह स्वयं योग कक्षाएं चलाने लगीं । उनके पास - पड़ोस की सभी महिलाएं , बच्चे व बुजुर्ग भी योग- विद्या को सीखने आने लगे ।उनकी ख्याति पूरे शहर में जल्द ही फैलने लगी । जया होनहार थी , जल्दी ही एक मशहूर योग शिक्षिका बन गई।


सुनीति केशरवानी 'नीति' 
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ