तुमने बंजर ज़मीन में खूबसूरत सा फुलवारी बना दिया है,
क्या ही किया ?
तुमने मकानों को घर बना दिया,
क्या ही किया ?
तुमने झोपडी को सजाया,
उसे अपना बनाया |
अपना घर परिवार समाज छोड़ा,
किसी और के घर को बुना और
उसे हर तरह से फिर संवारा,
क्या ही किया ?
जिस घर गयी वहाँ के वंश को आगे बढ़ाया, उस घर के रिश्तों को अपनाया,
पति को पूजा,
बच्चों के लिए निरंतर लगी रही ,
सबके लिए नौकरानी से भी
कुछ ज्यादा बनी रही,
तुमने क्या ही किया?
तुमने खुद को गलाया, खटाया,
असहमत बातों में, असहज रास्तों में,
अस्वीकार हालातों में,
असमता भरे चाहतों में भी,
तुम्हारा आत्मबल बिलकुल न डगमगाया,
तुमने क्या ही किया?
तुम बनी रही छाव सभी के खातिर
तपते धुप को सहते हुए,
संघर्ष के रास्तो में चुपचाप रहते हुए,
हर एक रूप में स्त्री,
तुमने क्या ही किया??
~Joyous Jaya
Ig id :@jaya_uncaptured
काठमांडू, नेपाल
नंबर : 9779803875372
.jpeg)
0 टिप्पणियाँ