बाल कविता: सूरज



नील गगन में आता सूरज,

चंदा से बतियाता सूरज।


चमके पूरा दिन शिद्दत से,

थक के फ़िर सो जाता सूरज।


सर्दी में दिखता है कम ही,

आए जब तो भाता सूरज।


गर्मी जब आती है, सबको,

तड़पाता, पिघलाता सूरज।


पौधे, फसलें पाते जीवन,

जब-जब नभ पर छाता सूरज।


अपनी किरणों की आभा से,

जग सारा दमकाता सूरज।


धरती जिसके आगे-पीछे

घूमे, वो कहलाता सूरज।


    अलका शर्मा

जम्‍मू, काश्‍मीर 




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