पृथ्वी का हाल देखकर हमारे मन में यह विचार आता है कि हमारी धरोहरें जो हमारे पूर्वजों ने हमे सौंपी थी हमने उनका अस्तित्व कहां तक संभाला है। देश कि आजादी के लिए कितने शहीदों का खून बहा जनता ने बंटवारे का दुख झेला और अभी भी देश अशांति के वातावरण से गुजर रहा है। पड़ोसी देशों ने आतंकवाद का जो खेल रचा है उसका परिणाम केवल विध्वंस की विभीषिका को बढ़ावा दे रहा है। जिसका परिणाम किसी के लिए हितकारी नहीं होगा। जान माल का नुकसान सभी को भुगतना पड़ेगा। विश्व का हाल देख कर हर मानव व्यतीत है !हर जगह मचा हुआ है हाहाकार अपनी सत्ता के लिए निर्दोषों खून बह रहा है। बच्चे मां-बाप से बिछड़ रहे हैं घर द्वार टूट हैं ! धरती मां की छाती फटी जा रही है। हरी भरी वसुंधरा कंक्रीट का जंगल बनती जा रही है।अपने को शक्तिशाली दिखाने के लिए हर राष्ट्र अपना वर्चस्व दिखा रहा है! सच्चाई, भाई-चारा अब सपना दिखने लगा है। वादे झूठे हो रहे हैं! दोस्ती का मतलब ही झूठा हो गया। हमारी धरती माँ रो रही है।
हमारे पूर्वजों ने जो हरी भरी वसुंधरा दी थी वह अब दिखाई नहीं पड़ती! पूर्वजों की बनाई धरोहर को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।आधुनिकता का नाम देकर कहा जाता है सबका विकास हो रहा है।यह कैसा विकास है हमारी वसुन्धरा जार जार रो रही है!पूरे विश्व का पर्यावरण बिगड़ रहा है प्राकृतिक आपदाओं का शिकार हो रहा है।हम स्वयं अपनी जड़ों को विनाश की ओर ले जा रहे हैं।आज हर देश राष्ट्र का कर्तव्य है कि वह अपनी वसुंधरा को नष्ट होने से बचाए! विकास की अंधी दौड़ में सत्ता कि लोलुपता में विनास की ओर बढ़ते कदम को रोक ले।अपनी संस्कृति और सभ्यता को उन्नति के शिखर पर पहुंचाने में अग्रसर हो।
राष्ट्रों को अपना विकास करने के लिए अपनी रक्षा के लिए सादा प्रयत्नशील रहना चाहिये परन्तु यह सोचना नहीं चाहिए हम विश्व को मिटाने की ताकत रखते हैं। आज विश्व का हाल देखकर हमारे पूर्वजों को हम लोग कौन सी खुशी दे पा रहे हैं। हर समय युद्ध के भय का वातावरण सामने नजर आता है। आतंकियों द्वारा किए गए नरसंहार का समाचार सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं उनके परिवारों की दशा देखकर मन द्रवित हो जाता है। धरती माता को बांटने का यह हर्ष होगा कि चारों तरफ एक देश दूसरे देश को मिटाने के लिए अपनी ताकत दिखता है। पड़ोसी भाई चारा किसे कहते हैं यह परिभाषा देश भूल गए हैं। राष्ट्रों में युद्ध की विभीषिका जनता को भूखे प्यासे रहने को मजबूर कर देती है।देखा जाए तो युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं है सबको अपने-अपने राष्ट्र को उन्नत बनाने की ओर अग्रसर रहना चाहिए ना ही किसी की तरक्की देखकर उसको मिटाने का सोचना चाहिए। “युद्ध का असर बच्चों पर क्या पड़ेगा”
आज सारे विश्व में युद्ध की विभिषिका से हर परिवार चिंतित है, किसी के परिवार के अनेकों सदस्य विदेश में नौकरी कर रहे हैं पढ़ाई कर रहे हैं सारा परिवार चिंतित है। सबसे ज्यादा बच्चों पर असर पड़ रहा है घबराहट है उनका पढ़ने में मन नहीं लगता डरते हैं कहीं हमारा भारत भी इस युद्ध की चपेट में ना आ जाए। सबसे ज्यादा असर उन राष्ट्रों के बच्चों पर होता है जहां पर युद्ध हो रहा होता है बच्चे घर से निकल नहीं पाते उनके स्कूल बंद हो जाते हैं खेलना बंद हो जाता है, जिनके माता-पिता युद्ध की चपेट में आ जाते हैं उन बच्चों का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है किसी-किसी में बदले की भावना उग्र रूप धारण कर लेती है। युद्ध कहीं पर भी हो उसका असर सभी जगह होता है।भारत में भी इस युद्ध का असर पड़ रहा है खाने पीने की चीज महंगी हो गई है बच्चों के पसंद के कितने फूड्स मिलना बंद हो गए हैं।
घर में गृहणीयाँ भी परेशान है-इस युद्ध का बच्चों पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव दोनों ही देखे जा सकते हैं जो बच्चों के मन में सेना में जाने का एक जुनून होता है उनके मन में डर बन सकता है।बच्चों के मन में विदेश में पढ़ाई करने का एक उत्साह रहता है उनको लगता है भारत से ज्यादा विदेश में पढ़ाई करने से लाभ मिलेगा उनका भी विश्वास डगमगा सकता है। इस युद्ध की विभिषिका से बच्चों के मन में अपने माता-पिता को लेकर बहुत तरह-तरह के विचारों से परेशान हैं क्योंकि किसी की माता विदेश में कुछ दिन के लिए किसी ट्रेनिंग के लिए गई है ,किसी के पिता गए हुए हैं उनकी वापसी का इंतजार कर रहे हैं और युद्ध के कारण नहीं आ पा रहे। बाल मन बहुत सुकोमल होता है। हमारी सरकार अपनी नागरिकों का ध्यान रख रही है सबको वापस लाने का प्रयत्न कर रही है कुछ आ भी गए हैं जो फंसे हैं वह भी वापस आएंगे। विदेशी सरकारें दूसरे देश से आने वाले बच्चों की पढ़ाई में कुछ नियम बना रही है जिसे भी बच्चों के मन में तनाव है।यह सच है किसी भी जगह युद्ध हो बच्चों पर उसका सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
रचना -शीला श्रीवास्तव भोपाल

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